वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट वाराणसी रोपवे को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों के खिलाफ सख्ती दिखाई है। पुलिस ने दो अलग-अलग X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट धारकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में हुई गंडोला दुर्घटना का वीडियो वाराणसी का बताकर पोस्ट किया।
पुलिस की जांच में सामने आया कि वायरल हुआ 26 सेकेंड का वीडियो वास्तव में छत्तीसगढ़ के मां बम्लेश्वरी मंदिर का है, जहां हाल ही में गंडोला हादसा हुआ था। लेकिन इसे “वाराणसी में मोदी जी का 800 करोड़ का रोपवे उद्घाटन के बाद टूट गया” बताकर प्रचारित किया गया। इससे जनता में भ्रम फैला और प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई।
डीसीपी काशी जोन के आदेश पर रोडवेज चौकी प्रभारी पुष्कर दुबे की तहरीर पर सिगरा थाने में FIR दर्ज की गई। थाना प्रभारी संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि दोनों अकाउंट धारकों – @sheetal2242 (डॉ. शीतल यादव) और @ashokdanoda – ने भ्रामक और तथ्यहीन पोस्ट कीं। दोनों के खिलाफ BNS की धारा 356 और 353(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
डॉ. शीतल यादव ने FIR दर्ज होने के बाद अपने अकाउंट से माफी मांगते हुए नया पोस्ट किया: “बिना जांच पड़ताल के वीडियो पोस्ट किया गया, इसके लिए मैं माफी मांगती हूं। यह वाराणसी की घटना नहीं है। जिनकी भावनाएं आहत हुईं उनसे क्षमा चाहती हूं और वीडियो डिलीट कर दिया है।”
पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने वालों पर आगे भी कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही जनता को सचेत किया गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है।
यह मामला एक बार फिर डिजिटल जिम्मेदारी की अहमियत को रेखांकित करता है—झूठी खबरें सिर्फ अफवाह नहीं फैलातीं, बल्कि विकास कार्यों की छवि को भी गहरा नुकसान पहुंचाती हैं।
रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी







