लखनऊ
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हुक्का बार संचालकों को बड़ा झटका देते हुए साफ कहा है कि हुक्का बार चलाना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत कोई मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने माना कि जनस्वास्थ्य और लोगों की सुरक्षा को देखते हुए राज्य सरकार ऐसे कारोबार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का अधिकार रखती है।
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने एम्पेरियो ग्रैंड प्राइवेट लिमिटेड समेत कई हुक्का बार संचालकों की याचिकाएं खारिज करते हुए यह अहम टिप्पणी की। याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई, प्रतिष्ठानों को बंद कराने और नए लाइसेंस न देने को चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया।
‘लोगों की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’
कोर्ट ने कहा कि हुक्का बारों में तंबाकू और निकोटीन का सेवन होता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इसे ‘रेस एक्स्ट्रा कमर्शियम’ यानी सामान्य व्यापारिक गतिविधियों से अलग श्रेणी में माना गया है, जिसे शराब और जुए की तरह











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