जौनपुर
एक तरफ पूरा जौनपुर जनपद भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान की मार झेल रहा है। वहीं दूसरी तरफ लगातार हो रही बिजली कटौती ने आम जनता की जिंदगी को मानो नरक बना दिया है। जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन. खुद मैदान में उतरकर स्वास्थ्य, पुलिस और बिजली विभाग को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दे चुके हैं। लेकिन धरातल पर हालात ऐसे हैं। कि शाम होते ही शहर अंधेरे और उमस की कैद में सिसकने लगता है।
शाम 7 बजे से लेकर रात्रि 12 बजे तक शहर के अनगिनत मोहल्लों और गांवों में बिजली की आंख-मिचौली जारी रहती है। कहीं “फ्यूज उड़ने” का बहाना, तो कहीं “ट्रांसफार्मर जलने” की कहानी सुनाकर जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बचते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है। कि क्या हर दिन जनता को यही बहाने सुनने के लिए छोड़ दिया जाएगा। आखिर इस लापरवाही की कीमत कब तक मासूम जनता अपनी रातों की नींद खोकर चुकाती रहेगी।
जिन घरों में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग हैं।
वहां हालात और भी भयावह हो चुके हैं। हर परिवार के पास इन्वर्टर नहीं है।
और जिनके पास नहीं है। वे पूरी रात हाथ से पंखा हिलाते हुए किसी तरह अपने बच्चों और बुजुर्गों को राहत देने की कोशिश कर रहे हैं। गर्मी से बेहाल लोग छतों और गलियों में जागकर रात काटने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है। कि जब जनता समय से अपना बिजली बिल जमा कर रही है।
तो फिर उन्हें मूलभूत सुविधा के लिए क्यों तड़पना पड़ रहा है। क्या बिजली विभाग केवल बिल वसूलने तक सीमित रह गया है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को आम आदमी की पीड़ा दिखाई नहीं देती।
जनता का दर्द अब गुस्से में बदलता जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं। कि आखिर सरकार के निर्देशों का पालन कब होगा। क्या केवल बैठकों और कागजी आदेशों से ही व्यवस्था सुधरेगी, या फिर जिम्मेदार अधिकारी जमीनी हकीकत भी देखेंगे।
जिले के जागरूक नागरिकों ने जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन. से मांग की है।
कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, लगातार कटौती वाले क्षेत्रों का निरीक्षण हो और दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। क्योंकि यह केवल बिजली का मुद्दा नहीं, बल्कि भीषण गर्मी में जनता के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है।
आज जौनपुर की जनता सिर्फ बिजली नहीं मांग रही, बल्कि अपने हिस्से की राहत, सम्मान और सुकून की रात मांग रही है। अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो जनता का आक्रोश किसी भी दिन सड़कों पर दिखाई दे सकता है।







