जौनपुर
जहां एक ओर भीषण गर्मी से इंसान ही नहीं बल्कि बेजुबान पक्षी भी तड़प रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जौनपुर का बेसिक शिक्षा विभाग इंसानियत और संवेदनशीलता की एक ऐसा मिसाल पेश कर रहा है। जिसने पूरे जनपद का दिल जीत लिया है।
जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. के निर्देश पर नगर के कंपोजिट विद्यालय मखदूम शाह अढ़न में पक्षियों के लिए दाना-पानी की विशेष व्यवस्था कराई गई। बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल स्वयं विद्यालय पहुंचे और मिट्टी के सकोरों में पानी भरवाकर बच्चों व शिक्षकों को जीव-दया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

विद्यालय परिसर में छात्र-छात्राएं पेड़ों और छतों पर परिंदे बांधते नजर आए। नन्हें बच्चों के हाथों में पानी के सकोरे देखकर हर संवेदनशील व्यक्ति का दिल भावुक हो उठा।
लेकिन बड़ा सवाल यह है।कि जब छोटे-छोटे बच्चे और शिक्षक बेजुबान पक्षियों के लिए आगे आ सकते हैं। तो आखिर नगर पालिका प्रशासन अब तक क्यों चुप बैठा है।
नगर के चौराहों, पार्कों, सार्वजनिक स्थलों और बाजारों में आज भी पक्षियों के लिए पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है। तेज धूप और आग उगलती गर्म हवाओं के बीच हजारों पक्षी प्यास से तड़प रहे हैं। लेकिन नगर पालिका की ओर से अब तक कोई बड़ा अभियान शुरू नहीं किया गया।
लोगों का कहना है। कि यदि बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों के माध्यम से इतनी बड़ी सामाजिक पहल कर सकता है। तो नगर पालिका को भी तत्काल शहर भर में “परिंडा अभियान” चलाकर सार्वजनिक स्थानों पर पानी के पात्र और दाना रखने की व्यवस्था करनी चाहिए।
बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। बल्कि बच्चों में मानवीय संवेदनाएं, जीव-दया और प्रकृति प्रेम जगाना भी शिक्षा का उद्देश्य है। उन्होंने जनपद के सभी शिक्षकों और नागरिकों से इस अभियान में सहयोग की अपील की।
अब देखना यह होगा कि बेसिक शिक्षा विभाग की इस सराहनीय पहल से नगर पालिका चेयरमैन और जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनाएं जागती हैं। या फिर बेजुबान पक्षी यूं ही प्यास से तड़पते रहेंगे।







