मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सामने बड़ी चुनौती थी। डेढ़ लाख परिवार सड़कों पर भूखों मरने की नौबत पर आ सकते थे। इन्होंने 18-19 वर्षों तक सेवा दी है। उम्र के इस पड़ाव में ये कहां जाते? हमने मंत्रिमंडल में फैसला किया कि इनकी सेवाएं समाप्त नहीं करेंगे,
बल्कि इनका सहयोग लेंगे। उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में ही सरकार ने शिक्षा मित्रों का मानदेय साढ़े तीन हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया था। अब और वृद्धि करते हुए इसे 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जो अप्रैल महीने से लागू हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को गोरखपुर में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित शिक्षा मित्र सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट आह्वान किया कि अब ट्रेड यूनियन वाली सोच और नकारात्मक वृत्ति को पूरी तरह त्याग देना होगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक या शिक्षा मित्र अगर केवल मांगों पर अड़े रहेंगे और नकारात्मक सोच रखेंगे, तो वे न केवल बच्चों की नींव कमजोर करेंगे बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की पुण्य क्षति कर देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा नेचर ट्रेड यूनियन जैसा नहीं हो सकता। पहले देश, फिर हम।
सकारात्मक भाव के साथ कार्य करने वाले ही अच्छी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का अपने आपसे कॉम्पिटिशन होना चाहिए। सरकार सकारात्मक सोच के साथ आपके साथ पूरी तरह खड़ी है, इसलिए नकारात्मक भाव बिल्कुल नहीं आने चाहिए।
संवाद और सहयोग से किया समय का समाधान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों से चली आ रही आपकी मांग को सरकार ने संवाद और सहयोग के माध्यम से हल किया है, न कि टकराव के रास्ते से। उन्होंने पिछली सरकारों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्होंने बिना नियम-कानून के सहायक शिक्षक के रूप में मान्यता देने का कुत्सित प्रयास किया, जो पूरी तरह नियम-विरुद्ध था।
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गलती के कारण सभी शिक्षा मित्रों की सेवाएं समाप्त करने का आदेश दे दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सामने बड़ी चुनौती थी। डेढ़ लाख परिवार सड़कों पर भूखों मरने की नौबत पर आ सकते थे। इन्होंने 18-19 वर्षों तक सेवा दी है। उम्र के इस पड़ाव में ये कहां जाते? हमने मंत्रिमंडल में फैसला किया कि इनकी सेवाएं समाप्त नहीं करेंगे, बल्कि इनका सहयोग लेंगे।
उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में ही सरकार ने शिक्षा मित्रों का मानदेय साढ़े तीन हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया था। अब और वृद्धि करते हुए इसे 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जो अप्रैल महीने से लागू हो गया है।











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