चंदौली इलिया
क्षेत्र के अम्मर डहिया गांव से आई यह तस्वीर सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। बुजुर्ग धनवन्ती देवी—जिन्हें इस बुढापे की उम्र में लाठी और सहारे की जरूरत है—आज अपने ही हक के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
उनकी कहानी दर्दनाक है। पति श्याम लाल ने दुसरी शादी कर ली। आरोप है कि दूसरी पत्नी के द्वारा उनके हक के जमीन का हिस्सा मांगने पर सिर्फ उनके साथ मारपीट की है बल्कि उनके हिस्से की करीब 15 बिस्वा जमीन पर भी कब्जा भी कर लिया गया है।
धनवन्ती देवी कई बार चकिया तहसील पहुंचीं—कागज, गुहार और उम्मीद के साथ।
लेकिन हर बार उन्हें मिला सिर्फ इंतज़ार… और निराशा।
तहसील की सीढ़ियां चढ़ते-उतरते अब उनकी ताकत जवाब देने लगी है, मगर इंसाफ की उम्मीद अभी बाकी है।
“मेरी जमीन दिलवा दीजिए…”
कंपकंपाती आवाज़ में धनवन्ती देवी प्रशासन से सिर्फ इतना कहती हैं—“मुझे मेरा हक दिलवा दीजिए, साहब।”
प्रशासनिक सिस्टम पर बड़ा सवाल
क्या एक बुजुर्ग महिला को अपने हक के लिए यूं ही भटकना पड़ेगा?
क्या तहसील स्तर पर शिकायतों का समाधान सिर्फ कागजों तक सीमित है?
अब देखना होगा…
क्या चंदौली प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर त्वरित कार्रवाई करेगा, या फिर धनवन्ती देवी की पुकार यूं ही अनसुनी रह जाएगी







