लखनऊ: बहुचर्चित मुख्तार अंसारी पर हुए जानलेवा हमले के 22 साल पुराने मामले में बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह समेत सभी पांच आरोपितों को अदालत ने बरी कर दिया है।
एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश हरबंस नारायण ने शनिवार शाम करीब 6:30 बजे फैसला* सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा। ऐसे में सभी आरोपियों को “संदेह का लाभ” देते हुए बरी किया जाता है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2004 का है, जब मुख्तार अंसारी ने लखनऊ कैंट थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कृष्णानंद राय, बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह और अन्य साथियों ने घात लगाकर उन पर जानलेवा फायरिंग की। बताया गया कि कैंट चौराहे के पास पहले से खड़ी टाटा सूमो, बोलेरो और सेंट्रो कार में सवार हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं।
अलग-अलग हथियारों से फायरिंग कर हत्या की साजिश रची गई थी।
जान बचाकर भागे थे मुख्तार फायरिंग के दौरान मुख्तार अंसारी और उनके साथी गाड़ियों से उतरकर जान बचाने के लिए छिप गए। उनकी दोनों सफारी गाड़ियां गोलियों से छलनी हो गई थीं। साथियों ने हमलावरों की पहचान करने का दावा भी किया था।
कोर्ट में कड़ी सुरक्षा, पेश हुए आरोपी
सुनवाई के दौरान बृजेश सिंह, आनंद राय और सुनील राय अदालत में मौजूद रहे। वहीं, जेल में बंद त्रिभुवन सिंह और अजय सिंह को कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया।
पुलिस जांच और चार्जशीट
पुलिस ने इस मामले में अलग-अलग समय पर चार्जशीट दाखिल की थी:
29 अप्रैल 2004 — कृष्णानंद राय समेत तीन आरोपियों पर चार्जशीट
1 दिसंबर 2006 — बृजेश सिंह, त्रिभुवन सिंह सहित अन्य पर आरोपपत्र
मुकदमे के दौरान ही हुई मुख्तार की मौत
इस केस के मुख्य शिकायतकर्ता मुख्तार अंसारी की 28 मार्च 2024 को बांदा जेल में मौत हो गई थी, जिससे मामला और भी संवेदनशील बन गया था।
कोर्ट का साफ संदेश
“सबूत पुख्ता नहीं, इसलिए सजा नहीं”
22 साल तक चले इस हाई-प्रोफाइल केस में आखिरकार कोर्ट ने साफ कर दिया कि बिना ठोस सबूत के सजा संभव नहीं।
यह फैसला उत्तर प्रदेश की सियासत और अपराध जगत से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक पर बड़ा असर डालने वाला माना जा रहा है।











Users Today : 13
Users This Year : 24852
Total Users : 37445
Views Today : 16
Total views : 73648