“गंगा” नाम सुनते ही मन श्रद्धा से झुक जाता है। गंगा केवल एक नदी नहीं, भारतीय अस्मिता का अभिन्न अंग हैं। मां गंगा हमारी सभ्यता की प्राणदायिनी हैं।
गंगा को केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन की आधारशीला के रूप में देखें। आम जनता को प्रदूषण के प्रति सचेत करने के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएं।
औद्योगिक कचरे और सीवेज को सीधे नदी में मिलने से रोकने के लिए ‘नमामि गंगे” जैसी पहल को जन-सहयोग से सफल बनाएं।
पूजा सामग्री, प्लास्टिक, और शवों के अवशेषों को नदी में बहाने के बजाय, उनके लिए उचित निपटान प्रणालियों का उपयोग करें।
गंगा किनारे अधिक से अधिक पेड़ लगाकर मिट्टी के कटाव को रोकें और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को सुनिश्चित करें।
स्वच्छता अभियान में भागीदारी सुनिश्चित करें। तटों पर नियमित सफाई अभियान चलाएं और आम लोगों को इससे जोड़ें ।
क्या हम माँ के दर्द को समझेंगे?











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