समय से पहले ही विद्यालय बंद हो जाता है और सुबह में भी समय के बाद ही विद्यालय में प्रार्थना होता है
बिना सूचना के अनुपस्थित रहने, एमडीएम गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता के आरोप शिक्षा विभाग बना मूकदर्शक*
चकिया चंन्दौली जिले के शहाबगंज ब्लाक के ग्राम सभा ठेकहा में स्थित प्राथमिक विद्यालय इन दिनों गलत कारणों से चर्चा में है। ग्रामीणों ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक अच्युतानंद त्रिपाठी पर मनमानी, अनुपस्थित रहने, एमडीएम में हेराफेरी और बच्चों की पढ़ाई से लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।
बिना सूचना के गायब, मेडिकल का सहारा
ग्रामीणों और विद्यालय के स्टाफ के अनुसार, प्रधानाध्यापक अक्सर बिना सुचना के विद्यालय से गायब रहते हैं और 8–10 दिन बाद आने पर मेडिकल प्रमाणपत्र लगाकर अनुपस्थिति को वैध दिखा देते हैं। जब यह जानकारी एबीएसए अजय कुमार तक पहुंची, तो उन्होंने गैरहाजिरी दर्ज कर रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को भेजी। इसके बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया।
विद्यालय में अनुशासनहीनता
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अच्युतानंद त्रिपाठी विद्यालय में देर से आते हैं, कभी-कभी हाजिरी लगाकर तुरंत चले जाते हैं, और विद्यालय परिसर में गुटखा खाते हुए देखे जाते हैं। पूछने पर वे कहते हैं कि “बीआरसी पर काम है या खेलकूद का कार्यक्रम है।”
एमडीएम और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप
एमडीएम (मिड-डे-मील) में भी प्रधानाध्यापक पर ज्यादा हाजिरी दिखाकर खाद्यान्न और धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वह विद्यालय के वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता नहीं रखते और किसी भी सवाल पर दबाव बनाते हैं।
“हमारा कोई कुछ नहीं कर सकता”
ग्रामीणों ने बताया कि जब शिकायत की जाती है तो प्रधानाध्यापक धमकी भरे लहजे में कहते हैं कि हमारा भाई बीजेपी का नेता है, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। कई बार लिखित शिकायतें बीआरसी और बीएसए कार्यालय में दी गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों की अपील
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में इस तरह की मनमानी से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। उनका कहना है —
“सरकार एक ओर शिक्षा को सुदृढ़ करने की बात करती है, वहीं ऐसे शिक्षक सरकारी योजनाओं को बदनाम कर रहे हैं। प्रशासन को तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”











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