प्रयागराज उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर कब्जे के मामलों में अब ग्राम प्रधान भी जवाबदेही से नहीं बच पाएंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए साफ कहा है कि यदि किसी ग्राम पंचायत क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा होता है और ग्राम प्रधान उसकी शिकायत या कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उन्हें भी जिम्मेदार माना जाएगा। कोर्ट ने ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने वाले ग्राम प्रधानों को पद से हटाने का निर्देश दिया है। यह फैसला प्रदेशभर के पंचायत प्रतिनिधियों के लिए चेतावनी साबित हो सकता है।
हाईकोर्ट का यह आदेश ग्रामीण स्तर पर फैले भूमि कब्जे के खिलाफ एक बड़ा और सख्त कदम माना जा रहा है। अब ग्राम प्रधानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी पंचायत में किसी भी सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा न हो, अन्यथा उनके पद पर संकट आ सकता है।गौरतलब है कि प्रदेश के कई जिलों से लंबे समय से सरकारी जमीनों पर कब्जे की शिकायतें सामने आ रही थीं। कोर्ट का यह आदेश अब उन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए जनप्रतिनिधियों की सीधी जवाबदेही तय करने वाला ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।







