गाजीपुर
सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी दिलाने का विज्ञापन देकर लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 3.54 लाख रुपये नकद, 23 सिम कार्ड, 13 एटीएम कार्ड, 10 मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, कलर प्रिंटर तथा दो चार पहिया वाहन बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपित फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से बेरोजगार युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर रकम ऐंठते थे।पुलिस के मुताबिक साइबर क्राइम थाना गाजीपुर में एक व्यक्ति ने प्रार्थना-पत्र देकर शिकायत की थी कि अज्ञात लोगों ने गाड़ी खराब होने सहित अन्य बहाने बनाकर साइबर अपराध से अर्जित धनराशि उसके सीएससी खाते में मंगाई और अगस्त से सितंबर के बीच करीब 15 लाख रुपये नगद निकाल लिए।
बाद में उसके सीएससी खाते समेत अन्य खातों के फ्रीज/लीन होने पर मामले की जानकारी सामने आई।
इस संबंध में मु0अ0सं0 33/2026 पंजीकृत किया गया।पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा एवं नोडल साइबर अपराध अपर पुलिस अधीक्षक नगर के निर्देशन तथा पुलिस उपाधीक्षक साइबर अपराध के नेतृत्व में पुलिस टीम ने साक्ष्य संकलन और सर्विलांस सेल की मदद से जांच आगे बढ़ाई। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
मुंबई और दिल्ली से जुटाता था सिम व म्यूल खाते
पुलिस के अनुसार पूछताछ और जांच में सामने आया कि गिरोह सुनियोजित तरीके से साइबर अपराध करता था। पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपित सोहन राम मुंबई और दिल्ली में रहकर दूसरे लोगों के नाम-पते पर सिम कार्ड और म्यूल बैंक खाते हासिल करता था। इसके लिए रिक्शा चालकों, सड़क किनारे सिम बेचने वाले लोगों तथा आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को रुपये का लालच दिया जाता था। पुलिस का दावा है कि ऐसे लोगों से करीब एक से डेढ़ हजार रुपये देकर सिम व खाते लिए जाते थे।इसके बाद सिम कार्ड कुरियर के माध्यम से गाजीपुर में रह रहे उसके बेटे सूर्य प्रकाश अरोरा तक पहुंचाए जाते थे। पुलिस के अनुसार सिम मिलने के बाद सूर्य प्रकाश अपने पिता को इसकी जानकारी देता था। इसके बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग आईडी के माध्यम से विदेश में नौकरी दिलाने के आकर्षक विज्ञापन चलाए जाते थे।
फर्जी कॉल सेंटर से शुरू होता था ठगी का खेल
पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर बेरोजगार युवक संपर्क करते थे। कॉल एक कथित फर्जी कॉल सेंटर तक पहुंचती थी, जहां कुछ युवतियों को नौकरी पर रखकर फोन रिसीव कराया जाता था। विदेश में नौकरी के इच्छुक लोगों को पहले रजिस्ट्रेशन के नाम पर करीब पांच हजार रुपये जमा कराने को कहा जाता था और उनसे बायोडाटा व पासपोर्ट संबंधी जानकारी ली जाती थी।इसके बाद कथित तौर पर कूटरचित जॉब ऑफर लेटर भेजकर और अधिक रकम की मांग की जाती थी। लोगों का विश्वास जीतने के लिए डमी फ्लाइट टिकट तक उपलब्ध कराने की बात पुलिस ने बताई है। इसके बाद पीड़ितों से बड़ी रकम म्यूल खातों में मंगाई जाती थी।
सीएससी सेंटर से निकालते थे रकम
पुलिस के अनुसार ठगी की रकम क्यूआर कोड के माध्यम से सीएससी संचालक के खाते में मंगाई जाती थी। इसके बाद रकम को नगद अथवा एटीएम के माध्यम से निकाल लिया जाता था। पुलिस का कहना है कि कुछ रकम का लालच देकर फैजल खान उर्फ सन्नी से भी पैसे निकलवाए जाते थे।पुलिस ने बरामद सिम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। मामले की जानकारी आई4सी, गृह मंत्रालय को भी भेजी जाएगी।
ये तीन आरोपित गिरफ्तार
पुलिस ने सोहन राम (45) पुत्र वासुदेव राम, निवासी सीपाह जहूराबाद, थाना बड़ेसर, सूर्य प्रकाश अरोरा (26) पुत्र सोहन राम, निवासी सीपाह जहूराबाद, थाना बड़ेसर तथा फैजल खान उर्फ सन्नी (29) पुत्र लीम अहमद खान, निवासी कस्बा रजदेपुर, पुलिस चौकी के पास, थाना कोतवाली गाजीपुर को गिरफ्तार किया है।
यह सामान हुआ बरामद
– 3,54,300 रुपये नकद
– एक कंप्यूटर सेट, सीपीयू, मॉनिटर, यूपीएस, की-बोर्ड व माउस
– एक लैपटॉप
– एक कलर प्रिंटर
– 10 मोबाइल फोन, जिनकी अनुमानित कीमत करीब पांच लाख रुपये
– विभिन्न बैंकों के 13 एटीएम कार्ड
– एयरटेल, जियो और वीआई के 23 सिम कार्ड
– हुंडई वरना और ईको स्पोर्ट्स समेत दो चार पहिया वाहन, अनुमानित कीमत करीब 20 लाख रुपये
पुलिस टीम को मिली सफलता
गिरफ्तारी एवं बरामदगी करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक मो. रहमतुल्लाह खान, निरीक्षक कृष्ण कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल रविकान्त जायसवाल, हेड कांस्टेबल राजकुमार, आरक्षी सुधाकर मिश्र तथा सर्विलांस सेल के आरक्षी मयंक सिंह शामिल रहे।
पुलिस की अपील
साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी से संबंधित आकर्षक विज्ञापन देखकर तत्काल विश्वास न करें और किसी भी व्यक्ति को ऑनलाइन रकम भेजने से पहले नौकरी एवं संस्था का भौतिक सत्यापन अवश्य करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं तथा साइबर अपराध की शिकायत संबंधित सरकारी साइबर पोर्टल पर दर्ज करें।
फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश करने के बाद बरामद सामान के साथ साइबर क्राइम पुलिस टीम










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