मीरजापुर जनपद के पहाड़ी विकास खंड के बेलवन गांव में नियमों को ताख पर रखकर चलाए जा रहे पिलर और निर्माण सामग्री प्लांट ने तबाही मचा दी है। प्लांट और भारी वाहनों से उड़ने वाली बेहिसाब धूल से खेतों की हरी-भरी फसलें सूख रही हैं, जिससे किसानों के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। फसलों के साथ-साथ यह जहरीला प्रदूषण ग्रामीणों की जिंदगियों पर भारी पड़ रहा है।
दम तोड़ता जनस्वास्थ्य और सांसों पर संकट
हवा में फैल रहे महीन धूल-कणों के कारण गांव के बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं में सांस की गंभीर बीमारियां, दमा, और आंखों में जलन जैसी समस्याएं तेजी से फैल रही हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेने से ग्रामीणों के फेफड़ों को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है, जिससे आम जनजीवन का स्वास्थ्य पूरी तरह खतरे में पड़ गया है।
NGT और CPCB के नियमों की सरेआम धज्जियां राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के सख्त मानकों के विपरीत, इस प्लांट के चारों ओर न तो कोई वृक्षारोपण है और न ही पानी के छिड़काव या एंटी-स्मोग गन की व्यवस्था है। घनी आबादी और कृषि भूमि के बीच संचालित इस इकाई द्वारा हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ाया जा रहा है।
*कानूनी कार्रवाई क्षेत्रीय अधिकारी का आश्वासन*
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत इस अवैध प्लांट पर भारी जुर्माना, आपराधिक मुकदमा और तत्काल सीज करने का प्रावधान है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्लांट का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आरके सिंह ने कहा है कि नियमों के विपरीत चल रहे इस प्लांट की जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।







