गाजीपुर पूर्वांचल के ऐतिहासिक और पौराणिक जनपद गाजीपुर का नाम बदलने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। विश्व हिंदू परिषद (गांधिपुरी) की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक औपचारिक पत्र भेजकर जनपद गाजीपुर का नाम बदलकर “गांधिपुरी” या “महर्षि विश्वामित्र नगर” किए जाने की पुरजोर मांग की गई है। यह ज्ञापन जिलाधिकारी महोदय, गाजीपुर के माध्यम से प्रेषित किया गया है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि गाजीपुर का इतिहास राजा गांधि और महर्षि विश्वामित्र की प्राचीन परंपरा से जुड़ा हुआ है, जो इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
आयोजकों और पदाधिकारियों का तर्क है कि मध्यकाल में वर्ष 1330 ईस्वी में विदेशी आक्रांताओं द्वारा इस प्राचीन सांस्कृतिक नगर का नाम बदलकर “गाजीपुर” कर दिया गया था, जिसे स्थानीय जनमानस गुलामी के प्रतीक के रूप में देखता है।
शासन स्तर से ऐतिहासिक ग्रंथों, राजस्व अभिलेखों, पुरातात्विक साक्ष्यों और विशेषज्ञों की राय का परीक्षण कराकर नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया गया है।
इस मांग से संबंधित प्रतिलिपि शासन और क्षेत्र के कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है:
जिसमें रविन्द्र जायसवाल – प्रभारी मंत्री, उ०प्र० सरकार, लखनऊ , ओमप्रकाश राय – जिलाध्यक्ष, भाजपा , सपना सिंह – अध्यक्ष, जिला पंचायत , विशाल सिंह चंचल – विधान परिषद सदस्य (MLC) , संगीता बलवन्त – राज्यसभा सदस्य , सरिता अग्रवाल – अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, गाजीपुर के नाम यह ज्ञापन विश्व हिंदू परिषद, गांधिपुरी के पदाधिकारियों—विपिन श्रीवास्तव (जिला संयोजक), रविराज सिंह (मंडल) और जिलामंत्री आदि के संयुक्त हस्ताक्षर के माध्यम से दिया गया है।
इस मांग के सामने आने के बाद से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का दौर में तेजी आ गया है।सोचने वाला बात है l कि क्या ? गाजीपुर का पुराना नाम फिर से लिखा या रखा जाएगा या इस पर सबकी निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी रह जाएंगी हैं।







