वाराणसी
गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर श्रद्धालुओं ने प्रशासन से निर्धारित स्थल पर समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके क्षेत्र में वर्ष 2003 से गणेश प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है और हर वर्ष विधि-विधान से प्रतिमा का विसर्जन किया जाता रहा है।
श्रद्धालुओं के अनुसार पहले गंगा नदी में प्रतिमा विसर्जित की जाती थी, लेकिन बाद में प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थल पर विसर्जन करने की व्यवस्था बताई गई। उनका कहना है कि इस वर्ष भी विसर्जन को लेकर प्रशासन से अनुमति प्राप्त हुई थी, लेकिन निर्धारित स्थल पर पहुंचने के बाद वहां की स्थिति और व्यवस्थाओं को लेकर श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से जारी सशर्त अनुमति आदेश में श्री गणेश प्रतिमा स्थापना, पूजन एवं विसर्जन कार्यक्रम के लिए अनुमति दी गई है। आदेश के अनुसार 14 सितंबर 2026 से 21 सितंबर 2026 तक कार्यक्रम की अवधि निर्धारित की गई थी।
विसर्जन के लिए निर्धारित मार्ग से होते हुए पाण्डेयपुर चौराहे से पंचकोशी रोड होते हुए पहड़िया पोखरा में प्रतिमा विसर्जन का उल्लेख किया गया है। आदेश में कार्यक्रम के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने, निर्धारित नियमों का पालन करने तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने सहित कई शर्तें भी लगाई गई हैं।
श्रद्धालुओं का आरोप है कि जिस स्थान पर विसर्जन की व्यवस्था की गई है, वहां पर्याप्त सुविधा, प्रकाश और साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाएं नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने विसर्जन के लिए स्थान निर्धारित किया है तो वहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक इंतजाम भी किए जाने चाहिए।
श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।







