उदयपुर
प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के पद्मिनी सभागार में दिवेर विजय महोत्सव — 2026 के उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ । मुख्य अतिथि राज्य के जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी थे। अध्यक्षता वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति उदयपुर के अध्यक्ष प्रोफेसर भगवती प्रकाश शर्मा ने की।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम ने कहा कि महाराष्ट्र में जिस श्रद्धा और गौरव के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज को जनमानस में स्थापित किया गया है, उसी प्रकार की श्रद्धा और गौरव वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के प्रति भी जन-जन में स्थापित करना होगा।

उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने भी विपरीत परिस्थितियों में वनवासी समाज और आदिवासी समुदाय के सहयोग को अपनी शक्ति बनाया और संघर्ष को निरंतर आगे बढ़ाया। प्रताप के संघर्ष में समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता दिखाई देती है। भामाशाह के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी आर्थिक सहायता ने महाराणा प्रताप को संघर्ष के दौरान बड़ा संबल प्रदान किया। उस समय एक भामाशाह था, लेकिन आज ‘भामाशाह’ शब्द प्रत्येक दानवीर के लिए प्रेरणा और पर्याय बन गया है।
दिवेर के ऐतिहासिक संघर्ष का उल्लेख करते हुए निम्बाराम ने कहा कि दिवेर सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और सुरक्षित क्षेत्र था। मुगलों ने भी यहां हाथी, घोड़े और पर्याप्त सैन्य बल तैनात कर रखा था। ऐसे कठिन सैन्य परिदृश्य में महाराणा प्रताप ने छापामार युद्ध नीति को प्रभावी रूप से अपनाया और दिवेर के आसपास स्थापित मुगल ठिकानों पर निर्णायक प्रहार किए। उन्होंने कहा कि दिवेर क्षेत्र के आसपास के 36 मुगल थानों पर विजय प्राप्त करना प्रताप के अदम्य साहस और युद्ध कौशल का परिचायक है।
निम्बाराम ने कहा कि आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी अपने राष्ट्रीय तीर्थों, आध्यात्मिक केन्द्रों और गौरवशाली ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचे तथा भारत के इतिहास, संस्कृति और वीर परंपरा को जाने।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि दस दिन तक चलने वाले इस आयोजन में अधिक से अधिक सहभागी बनें और समाज में, विशेषकर हिन्दू समाज में, गौरव, एकता और राष्ट्रभाव की चेतना को मजबूत करने का कार्य करें।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला







