गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर जयगुरुदेव आश्रम, चकपड़ौना में श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच विशेष सत्संग एवं गुरु पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं सत्संगी प्रेमी आश्रम पहुंचे और गुरु चरणों में श्रद्धा अर्पित कर मानव कल्याण एवं विश्व शांति की कामना की।
कार्यक्रम का शुभारम्भ आश्रम की विविध सेवाओं में श्रमदान एवं स्वच्छता अभियान से हुआ। इसके उपरांत शब्द स्वरूप परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर गुरु वंदना की गई।
संस्थाध्यक्ष श्रद्धेय पंकज जी महाराज के मार्गदर्शन में बाबा जयगुरुदेव जी महाराज की अमृतवाणी का वाचन किया गया। इस दौरान सत्य, अहिंसा, शाकाहार, सदाचार और आध्यात्मिक जीवन के सिद्धांतों पर चलने का आह्वान किया गया।
मुख्य वक्ता ज्ञानप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर आत्मज्ञान के प्रकाश और ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्ण सद्गुरु का सान्निध्य मानव जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है, क्योंकि गुरु की कृपा से ही जीव जन्म-मरण के बंधनों से मुक्त होकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से गुरु के उपदेशों को जीवन में उतारने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक प्रार्थना की गई तथा सभी श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित किया गया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, अनुशासन, सेवा और आध्यात्मिक उत्साह का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। जिला अध्यक्ष प्रेमशंकर मौर्य के मथुरा में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव में सम्मिलित होने के कारण स्थानीय कार्यक्रम का संचालन जगन्नाथ, गुलाब एवं डा. विजय ने किया।
इस अवसर पर छोटेलाल (कैशियर), इंद्रजीत, डा. कृपा, जगदीश चंद्र श्रीवास्तव, शंकर, अभिनन्दन, कृतिका, निधि, हर्षिता सहित जनपद के अनेक सत्संगी प्रेमी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।











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