चन्दौली
चन्दौली चहनियां अंतर्गत ग्राम सभा मथेला लोलपुर में एक नीलगाय की कथित रूप से प्यास के कारण हुई मौत ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है। गांव के पास स्थित लगभग 12 बीघा क्षेत्रफल वाले तालाब में पर्याप्त पानी न होने तथा उसके नवीनीकरण एवं सुंदरीकरण का कार्य न होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा जल संरक्षण, तालाबों के पुनर्जीवन और अमृत सरोवर जैसी योजनाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है, लेकिन मथेला लोलपुर में इन योजनाओं का लाभ धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। परिणामस्वरूप पशु-पक्षियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
नीलगाय की मौत के बाद ग्रामीणों ने उसे सम्मानपूर्वक मिट्टी में दफन किया और गहरा दुख व्यक्त किया। इस घटना के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
ग्रामीणों के अनुसार इस मामले में केवल एक विभाग नहीं, बल्कि कई स्तरों पर जवाबदेही बनती है। ग्राम सभा के तालाबों और सार्वजनिक संसाधनों के रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत की भी होती है। वहीं विकास कार्यों की निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) चहनियां तथा संबंधित विकासखंड प्रशासन की भी है।
यदि तालाब का समय पर नवीनीकरण, गहरीकरण और जल संरक्षण का कार्य कराया गया होता तो शायद यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा मथेला लोलपुर से लेकर विकासखंड चहनियां तक के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस घटना से सबक लेते हुए तत्काल जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
एक बेजुबान नीलगाय की मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जल संरक्षण और अमृत सरोवर योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तब भी ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब उपेक्षा का शिकार क्यों हैं? अब ग्रामीण इस मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और तालाब के पुनर्जीवन की मांग कर रहे हैं।







