वाराणसी।
भेलूपुर स्थित डाइमंड होटल में “बनारस उत्सव” के अंतर्गत शुक्रवार को भव्य पुस्तक विमोचन एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका सुनीता ऐरॉन की नई पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद एवं राजद के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर मनोज झा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका, गठबंधन राजनीति की प्रासंगिकता और लोकतांत्रिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना रहा।
गठबंधन राजनीति पर मनोज झा का वक्तव्य
प्रो. मनोज झा ने अपने संबोधन में गठबंधन और विलय के अंतर को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि गठबंधन “सलाद बाउल” की तरह होता है, जिसमें सभी दल अपनी अलग पहचान के साथ मिलकर कार्य करते हैं, जबकि विलय में सभी पहचान समाप्त हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में कई महत्वपूर्ण सामाजिक और कल्याणकारी कानून गठबंधन सरकारों के दौर में बने हैं, जिनमें RTI, RTE और मनरेगा जैसे कानून प्रमुख हैं।
सुनीता ऐरॉन ने रखे पुस्तक के विचार
लेखिका सुनीता ऐरॉन ने अपनी पुस्तक के निष्कर्ष साझा करते हुए कहा कि क्षेत्रीय दलों के सामने राष्ट्रीय विस्तार की चुनौती एक जटिल स्थिति पैदा करती है। कई बार विस्तार की दौड़ में वे अपने मूल जनाधार से दूरी बना लेते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय राजनीति में सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दों की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है।
प्रेस वार्ता में उठे समसामयिक मुद्दे
कार्यक्रम के बाद मीडिया संवाद में राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक विषयों पर चर्चा हुई। प्रो. मनोज झा ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आर्थिक दबाव और महंगाई के प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि नीतियों का लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए।
शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था पर चर्चा
संवाद के दौरान नीट और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठे, जिस पर वक्ताओं ने शिक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही को जरूरी बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने “बनारस उत्सव” को एक महत्वपूर्ण बौद्धिक मंच बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लोकतांत्रिक संवाद और वैचारिक विमर्श को मजबूती प्रदान करते हैं।











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