चंदौली
शिकारगंज।गेहूं खरीद व्यवस्था सवालों के घेरे में है। कई क्रय केंद्रों पर अब तक खरीद शुरू नहीं हो सकी है, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। खासकर चकिया तहसील क्षेत्र में गेहूं खरीद की रफ्तार बेहद धीमी बताई जा रही है।
शिकारगंज कोआपरेटिव सोसाइटी स्थित पीसीएफ केंद्र पर अब तक गेहूं खरीद शून्य बताई जा रही है। किसानों का आरोप है कि जब वे गेहूं बेचने केंद्र पर पहुंचते हैं, तो उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि केंद्र पर बोरे उपलब्ध नहीं हैं। हैरानी की बात यह है कि कई केंद्रों पर अभी तक सरकारी खरीद का बैनर तक नहीं लगाया गया है।
जिले के कई पीसीएफ, पीसीयू और यूपीएसएस केंद्रों पर बोरों की भारी कमी बताई जा रही है। पीसीयू सेंटर खरौझा, तियरी तथा पीसीएफ सेंटर इलिया में भी सीमित संख्या में बोरे पहुंचने की बात सामने आई है। किसान तैयार हैं, लेकिन खरीद केंद्रों पर व्यवस्थाएं अधूरी होने के कारण उन्हें मायूस होकर घर लौटना पड़ रहा है।
किसान विकास मंच के नेता सरोज कुमार ने बताया कि शिकारगंज क्षेत्र में अभी तक कोई किसान सरकारी केंद्र पर गेहूं नहीं बेच पाया है। उनका कहना है कि बोरों की अनुपलब्धता सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
प्रगतिशील किसान आदित्य मौर्य ने बताया कि कई बार गेहूं बेचने के प्रयास के बावजूद हर बार एक ही जवाब मिला—“बोरे नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि किसान पहले फार्मर रजिस्ट्री और किसान आईडी जैसी प्रक्रियाओं में उलझे रहे, और अब खरीद केंद्रों पर संसाधनों की कमी नई समस्या बन गई है।
किसान विकास मंच के संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने आरोप लगाया कि यदि खरीद केंद्रों पर उचित व्यवस्था होती तो किसानों को औने-पौने दाम पर व्यापारियों को गेहूं बेचने की मजबूरी नहीं होती। उन्होंने कहा कि सरकारी लापरवाही का सीधा नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है।
हालांकि प्रशासन की ओर से बोरों की कमी न होने देने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। किसान विकास मंच ने इस समस्या को लेकर उप जिलाधिकारी चकिया और जिलाधिकारी चंदौली से मुलाकात करने की बात कही है।











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