लखनऊ
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की बैठक में उस समय हलचल मच गई जब सदस्य सतेंद्र बारी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारी समाज के जाति प्रमाणपत्रों को गलत तरीके से नाई जाति के नाम पर बनाए जाने का गंभीर मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने इसे सीधा-सीधा समाज के अधिकारों के साथ अन्याय बताते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए।
सतेंद्र बारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में उनके आक्रामक रुख के बाद मामला तत्काल संज्ञान में लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही इस पूरे प्रकरण की व्यापक जांच शुरू की जाएगी और बारी समाज के सभी गलत जारी किए गए जाति प्रमाणपत्रों को निरस्त कर नए सिरे से सही श्रेणी में प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। इससे प्रभावित हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सतेंद्र बारी ने साफ कहा—“समाज के अधिकारों से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। जब तक हर व्यक्ति को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।”
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला











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