वाराणसी:
जहाँ एक ओर सरकार ‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से एक ऐसा मामला सामने आया है जो सबको आश्चर्यचकित कर दे रहा है। यह कहानी है सेवापुरी ब्लॉक के ग्राम सभा अदमापुर महनाग के मूल निवासी सुबेदार यादव की जिन्होंने गाँव के भविष्य के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन तक दांव पर लगा दी, लेकिन आज वे उपेक्षा के शिकार हैं।
खिलाड़ियों के लिए खुद को कर्ज में डुबोया सुबेदार यादव ने बताया कि 2013 में गाँव के पहलवानों को मिट्टी और बारिश के कारण अभ्यास में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। खिलाड़ियों के इस दर्द को देखते हुए उन्होंने एक भव्य अखाड़े के निर्माण का संकल्प लिया।
इस कार्य के लिए उन्होंने अपनी ढाई बीघा पुश्तैनी जमीन गिरवी रख दी। रिश्तेदारों और अन्य माध्यमों से करीब 9 लाख रुपये का कर्ज लेकर अखाड़ा तैयार कराया सुबेदार यादव के इसी व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम था कि वर्ष 2016 में ग्राम सभा अदमापुर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार से सम्मानित के लिए चयनित किया गया और 2018 में उनकी ग्राम सभा अदमापुर महनाग को पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्मान’ से नवाजा गया।
भारत सरकार ने ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत को तो पुरस्कृत किया, लेकिन जिस व्यक्ति ने अपना सब कुछ बेचकर इस अखाड़े की नींव रखी, उसे न सम्मान मिला और न ही कोई आर्थिक सहायता। मैंने देश सेवा और जनहित में अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, लेकिन मेरे साथ भेदभाव हुआ। मुझे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया सुबेदार यादव अपनी इसी व्यथा को लेकर अब सीधे प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुँचाने का निर्णय लिया है।
आगामी 28 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे को देखते हुए सुबेदार यादव ने प्रधानमंत्री कार्यालय वाराणसी को पत्र लिखकर पीएम से मिलने की अनुमति (प्रोटोकॉल के तहत) माँगी है उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि एक जागरूक मतदाता और नागरिक के रूप में यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है कि वे अपने सांसद को अपनी व्यथा बताएं और न्याय की गुहार लगाएँ। ग्राम सभा को मिला सम्मान, पर सुबेदार को नहीं। 28 अप्रैल प्रधानमंत्री के वाराणसी आगमन पर मुलाकात की मांग। पीएम कार्यालय पत्र सौंपकर सुबेदार यादव ने की हैं।
रिपोर्ट – विजयलक्ष्मी तिवारी











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