उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित इलाहाबाद उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की खंडपीठ लखनऊ में एक ऐसा वाकया देखने को मिला, जिससे मन बहुत विचलित है। जो लोग उस क्षण उस दृश्य के साक्षी रहे, मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि उनको बहुत दुख हुआ होगा, आश्चर्य हुआ होगा और उनके मन की आत्मा पर छाप पड़ गई होगी।
इस तरह एक युवती, जिसने तकरीबन आठ माह के बच्चे को गोद में लिया, सी ब्लॉक के चैंबर की टॉप फ्लोर पर चढ़ गई और वहां से ऊपर छत पर जा खड़ी हुई। लोग मिन्नत करते रहे कि बेटा ऐसा मत करो, खतरा है। ऊपर से नीचे कोई देखेगा तो निश्चित तौर पर डर जाएगा। लेकिन करीब घंटे-डेढ़ घंटे मशक्कत के बाद, एक दरोगा पांडे जी ने हिम्मत और सूझबूझ दिखाते हुए आर्मी वालों और अधिवक्ताओं के सहयोग से उसे नीचे उतारा। युवती ध्यान नहीं दे पाई और पांडे जी ने तपाक से पकड़ लिया और नीचे ले आए।
जब अधिवक्ता साथियों ने देखा कि लड़की वहां पर चढ़ी है और कोई अनहोनी हो सकती है, तो वे तुरंत नीचे फ्लोर पर आ गए और अपना गाउन निकाल कर फैलाने लगे, ताकि अगर किसी प्रकार वह फिसल कर गिर जाए तो उसे बचाया जा सके। सबने जो समझ आया वही किया। सभी लोग निवेदन कर रहे थे कि बहन आ जाओ, मैडम आ जाइए, बेटा आ जाओ, लेकिन वह इतनी परेशान और प्रताड़ित दिख रही थी कि वह कुछ सुनने को तैयार नहीं थी।
अब सीधा सवाल है कि आखिर एक युवा लड़की, उच्च न्यायालय जहां न्याय मिलता है, वहीं पर विवश होकर छत पर क्यों चढ़ गई। क्या वह न्याय के दरवाजे पर आकर भी न्याय नहीं पा सकती। जहां तक उस युवती से सुना, वह कह रही थी कि एक मुस्लिम युवक ने उससे शादी की और अब उसे छोड़ दिया और उस पर कन्वर्ट होने का दबाव बना रहा है। इसी के लिए वह अदालत आई थी, उसकी सुनवाई नहीं हो रही थी। वह लगातार रो रही थी और डरी हुई थी।
तो सीधा यक्ष प्रश्न यह है कि ऐसे मामलों में त्वरित फैसला कैसे हो। जिम्मेदार व्यक्तियों को चिन्हित करके उन्हें सजा कैसे मिले और पीड़ित को समय पर न्याय कैसे पहुंचे। क्या हमारी न्याय प्रणाली इतनी कमजोर हो गई है कि ऐसे मामलों में समय पर न्याय नहीं दे पा रही। क्या कानून में जो फेरबदल किए जा रहे हैं, वह ऐसे मामलों में कारगर हैं। क्या ऐसे मामलों में समरी ट्रायल करके दो-चार माह में फैसला नहीं किया जा सकता।
आज कई लड़कियां ऐसे जाल में फंसकर अपना जीवन बर्बाद करने पर मजबूर हो रही हैं। लेकिन शासन, प्रशासन और न्याय व्यवस्था में बैठे लोग आंख बंद किए बैठे हैं। अब समय है कि इस पर सख्ती से काम हो, वरना हालात और बिगड़ेंगे। अभी हमारा विधि विज्ञान बहुत पीछे है और सिस्टम पूरी तरह फेल नजर आ रहा है।
ईश्वर उस युवती को संभाले, जीवन लंबा है, उसे सही रास्ता दे और उसे न्याय मिले।







