वाराणसी
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पत्रकार एवं समाजसेवी आदर्श श्रीवास्तव ने समाज को नारी सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश देते हुए कहा कि नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की असली शक्ति है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश और समाज की प्रगति का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि वहां महिलाओं को कितना सम्मान, सुरक्षा और अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, ममता और त्याग का प्रतीक माना गया है। इतिहास से लेकर वर्तमान तक महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दिया है। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, विज्ञान, प्रशासन, राजनीति, खेल, पत्रकारिता या समाज सेवा—हर जगह महिलाओं ने यह सिद्ध किया है कि अवसर मिलने पर वे किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं।
आदर्श श्रीवास्तव ने कहा कि आज की नारी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के साथ समाज के हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही है। यह बदलते भारत की सकारात्मक तस्वीर है। लेकिन इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपने घर, परिवार और समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता का व्यवहार करना चाहिए। बेटियों को अच्छी शिक्षा और सुरक्षित वातावरण देना ही सच्चे अर्थों में महिला सशक्तिकरण है।
आदर्श श्रीवास्तव ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा दें और महिलाओं के सम्मान तथा अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। उन्होंने कहा कि जब समाज की आधी आबादी सशक्त, शिक्षित और सुरक्षित होगी, तभी राष्ट्र की प्रगति का मार्ग और अधिक मजबूत होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम महिलाओं को केवल सम्मान देने की बात न करें, बल्कि उनके अधिकारों और अवसरों को भी सुनिश्चित करें। समाज में हर बेटी को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले और वह अपने सपनों को साकार कर सके—यही एक विकसित और सशक्त भारत की पहचान होगी
विशेष कथन
“नारी केवल परिवार की शक्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है।
महिलाओं का सम्मान ही एक सभ्य और विकसित समाज की पहचान है।”
“नारी का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि व्यवहार और अवसर से होना चाहिए।
हर बेटी सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानित होगी तभी समाज और राष्ट्र सच में आगे बढ़ेगा।”











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