
नरैनी (बांदा): “गौ सेवा” के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये बह रहे हैं, लेकिन ग्राम पंचायत ‘तेरा ब’ की तस्वीरें रूह कंपा देने वाली हैं। सवाल सीधा है भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते रहेंगे ये बेजुबान? कागजों पर 3 केयरटेकर पालकर 2 का पैसा प्रधान और सचिव की जेब में जाता हैं
और कब तक VDO साहब की जांच फाइलों में दबी रहेगी, जबकि बाहर गौवंश दम तोड़ रहे हैं?
प्रशासनिक निर्लज्जता की पराकाष्ठा:
गौसेवक राजाराम राही द्वारा उठाए गए सवाल प्रशासन की संवेदनशीलता पर तमाचा हैं। जब सरकारी रिकॉर्ड में 3 लोग तैनात हैं, तो मौके पर सिर्फ एक ही क्यों? बाकी दो का वेतन किसकी तिजोरी भर रहा है? पशु चिकित्सक बदौसा की चुप्पी और अतर्रा तहसील के अधिकारियों की अनदेखी यह दर्शाती है कि यहाँ ‘ऊपर से नीचे तक’ सब गोलमाल है।
यह पाप है, लापरवाही नहीं:
तड़पती हुई गायें, कीचड़ में सने शव और खाली चरहियां (नाद) यह चीख-चीख कर कह रही हैं कि यहाँ
विकासखंड नरैनी के जिम्मेदार अधिकारी अपना धर्म भूल चुके हैं। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बावजूद बांदा के इस कोने में सरकारी तंत्र बेलगाम है।
जनता की पुकार:
अब समय सिर्फ ज्ञापन देने का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है।
अगर आज इन बेजुबानों की मौत पर पर्दा डाला गया, तो कल यह भ्रष्टाचार किसी और रूप में समाज को डसेगा। प्रशासन को जागना होगा, वरना ‘तेरा ब’ की ये मौतों का हिसाब इतिहास जरूर मांगेगा।
रिपोर्ट – सुनील यादव











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