नौगढ़ (चंदौली)
चंदौली जिले की नौगढ़ तहसील के मलेवरिया गांव में एक आबाद मकान के ध्वस्तीकरण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। पीड़िता गीता तिवारी, पत्नी विनोद कुमार तिवारी, का आरोप है कि 31 मई 2025 को उनका मकान बिना पूर्व नोटिस के ध्वस्त कर दिया गया। अब सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी के आधार पर इस कार्रवाई की वैधानिकता और राजस्व अभिलेखों में दर्ज आदेशों को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शिकायत दूसरी आराजी की, कार्रवाई दूसरी जमीन पर होने का आरोप
मामले में सामने आए नए तथ्यों के अनुसार, जिस भूमि को लेकर शिकायत की गई थी, वह कथित तौर पर अलग आराजी थी, जबकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आराजी संख्या 151 मि. (पुराना नंबर 85/10 मि.) पर किए जाने का आरोप है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह उसकी निजी आबाद भूमि थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किस आधार पर इस भूमि पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई और संबंधित राजस्व अभिलेखों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
आदेश की प्रमाणिकता और डाक रजिस्टर पर सवाल
मामले का दूसरा अहम पहलू कथित आदेश से जुड़ा है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, जिस आदेश के आधार पर पुलिस बल बुलाकर कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है, उसकी प्रमाणिकता पर सवाल उठे हैं। दावा है कि संबंधित दिन तत्कालीन एसडीएम नौगढ़ कार्यालय में मौजूद नहीं थे और तहसील के डाक रजिस्टर में भी उक्त आदेश का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला।
यदि अभिलेखीय जांच में इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह सवाल महत्वपूर्ण है भुक्तभोगी को कब न्याय मिलता है और क्षतिपुर्ती होती है बडा सवाल है और दोषी कर्मचारियों पर क्या कार्यवाही होती है!







