नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि दोनों देश समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं। ट्रंप के इस बयान से द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और इसे पूरा करने की समयसीमा के बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारत के साथ व्यापार समझौते से जुड़े सवाल पर कहा कि वह भारत के साथ डील करना चाहते हैं और दोनों देश इसके काफी करीब हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत के साथ होने वाला समझौता पहले किए गए व्यापार समझौतों से काफी अलग होगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या बोले ट्रंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान को भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप ने समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और किन विषयों पर अभी बातचीत बाकी है।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना और बाजारों तक पहुंच से जुड़े मुद्दों का समाधान तलाशना है। ऐसे समझौते में आयात शुल्क, बाजार पहुंच और विभिन्न व्यापारिक क्षेत्रों से जुड़े प्रावधान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मार्को रुबियो के भारत दौरे के बीच आया बयान
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे को लेकर दोनों देशों के संबंधों पर चर्चा हो रही है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा, तकनीक, रक्षा सहयोग और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क जैसे मुद्दे भी द्विपक्षीय संबंधों के अहम हिस्से हैं।
दोनों देशों के बीच जारी संवाद को व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, किसी भी समझौते की प्रगति का वास्तविक आकलन उसकी आधिकारिक शर्तों और दोनों सरकारों की घोषणाओं के आधार पर ही किया जा सकेगा।
पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के बीच भी हुई थी बातचीत
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर के बीच भी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत हुई थी। इन चर्चाओं में प्रस्तावित समझौते से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों को अपने-अपने आर्थिक हितों, घरेलू उद्योगों और बाजार से जुड़ी प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाना होगा। ऐसे में समझौते की शर्तों पर सहमति बनना इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फरवरी में तय हुई थी द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा
भारत और अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण की रूपरेखा तय करने की घोषणा की थी। इसके बाद टैरिफ यानी आयात शुल्क से संबंधित नीतिगत बदलावों के बीच समझौते को लेकर बातचीत जारी रही।
आयात शुल्क किसी दूसरे देश से आने वाले सामान पर लगाया जाने वाला कर होता है। इसमें बदलाव होने से वस्तुओं की कीमत, कारोबार की लागत और दोनों देशों के बीच व्यापार की शर्तों पर असर पड़ सकता है। इसलिए व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में टैरिफ और बाजार पहुंच जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
अब समझौते की शर्तों और समयसीमा पर टिकी नजरें
डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर कब तक औपचारिक घोषणा करते हैं। समझौते की शर्तें क्या होंगी, किन क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलेगी और भारतीय कारोबारियों तथा अमेरिकी कंपनियों को इससे क्या लाभ मिलेंगे, इन सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं।
फिलहाल ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं और कहा है कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। हालांकि, अंतिम समझौते की घोषणा और उसकी शर्तें सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को इससे किस तरह नई दिशा मिलेगी।







