वाराणसी
शहर में कुछ पुलिस चौकियों के बोर्ड देखकर ऐसा लग रहा है,मानो कानून-व्यवस्था संभालने के साथ-साथ शिक्षा का प्रचार-प्रसार भी पुलिस की नई जिम्मेदारी बन गया हो!ताजा फोटो थाना लालपुर-पांडेयपुर क्षेत्र की पांडेयपुर चौकी का है,जहां चौकी के बोर्ड पर आधे हिस्से में पुलिस चौकी का नाम है,तो बाकी हिस्से में इंस्टीट्यूट का प्रचार नजर आ रहा है।इतना ही नहीं,बगल में भी बैनर लगा हुआ है।
अब ऐसे बोर्ड को देखकर आम आदमी एक पल के लिए सोच में पड़ जाए कि वह पुलिस चौकी में आया है या किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने!हालत यह है कि बोर्ड पर चौकी की पहचान ही प्रचार के बीच दबती नजर आ रही है।
शहर में पुलिस चौकियों और थानों के आसपास ऐसे नजारे व्यवस्था और सरकारी परिसरों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े करते हैं।आखिर पुलिस चौकी के बोर्ड पर निजी संस्थान का प्रचार किसकी अनुमति से लगा है?क्या सरकारी चौकी का बोर्ड प्रचार का नया ठिकाना बन गया है,या जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर नहीं पड़ रही?
फिलहाल,पांडेयपुर चौकी का यह नजारा चर्चा का विषय है।सवाल सीधा है—चौकी की पहचान पुलिस से होगी या कोचिंग के प्रचार से?







