वाराणसी,
आइयें हम बतातें हैं,कारखांस कौन है, इनकी नियुक्ति कहां से होती है, क्यों होती है, आपको बता रहे हैं कारखास नामक पुलिस विभाग में कोई नियुक्ति नहीं है। बल्कि यह नियुक्ति हरेक थाने के प्रभारी स्वयं करते हैं।
क्योंकि कारखास हीं, थाने का वजींर, मोहरा होता है जो सारे अवैध कार्यों की वसूली करता है जिससें कर खास की चांनी चौक रसभरी मलाई काटते हैं और यही कारावास बिना वर्दी कें शादी वर्दी का इस्तेमाल करते नजर आते हैं।
थाना प्रभारी इनको इसलिए रखते हैं यदि वसूली करते हुए घूस लेते हुए पकड़े जाएं तो फिर यह थाना प्रभारी पर कोई असर ना आए इसलिए हर थाना प्रभारी अपने थाने पर खरखासों की नियुक्ति करता है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मिर्जामुराद थाने के कारखास कमलेश कुमार यादव उर्फ मुलायम ने ट्रांसफर होने के बाद भी अंगद की तरह मिर्जामुराद में पांव जमाया।
आखिर मिर्जामुराद थाने में ऐसा कौन सा खजाना गड़ा है जिसको छोड़कर मिर्जामुराद के कर खास ट्रांसपोर्ट होने के बाद भी नहीं जाना चाहते हैं जैसा कि हम आपको बताते चलें कि जैसे ही किसी थाने के अंतर्गत हो रहे अवैध कार्यों का पत्रकार जैसे ही खबर प्रकाशित करता है सबसे पहले उसे थाने के कारखास को बहुत बुरा लगता है और सबसे ज्यादा उछल कूद भी उसे थाने का कारखास ही करता है।







