विंध्याचल में त्रिदिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का भव्य समापन ऋषि पंचमी पर सम्पूर्ति सत्र सम्पन्न, वैदिक परंपरा के संरक्षण का लिया संकल्प

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विंध्याचल, मिर्जापुर। जगत जननी माँ विंध्यवासिनी की असीम कृपा से माँ विंध्यवासिनी श्रवण वेद पाठशाला परिसर में आयोजित त्रिदिवसीय क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का सोमवार को ऋषि पंचमी के पावन पर्व पर सम्पूर्ति सत्र के साथ भव्य समापन हो गया।

सम्मेलन के संयोजक एवं पाठशाला के प्रधानाचार्य आचार्य अगस्त्य कुमार द्विवेदी ने बताया कि यह आयोजन महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार, उज्जैन तथा माँ विंध्यवासिनी श्रवण वेद पाठशाला, विंध्याचल धाम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परम्परा से संचालित वैदिक पाठशालाएँ पूरे देश में सनातन और वैदिक परम्परा के संरक्षण-संवर्धन हेतु निरंतर कार्य कर रही हैं। इसी उद्देश्य को लेकर इस क्षेत्रीय वैदिक सम्मेलन का आयोजन किया गया।

 

तीन दिवसीय ज्ञान यज्ञ इस प्रकार सम्पन्न हुआ –

प्रथम दिवस 13 सितम्बर : माँ विंध्यवासिनी गेट नं. 1 से 500 से अधिक बटुकों, हाथियों और घोड़ों के साथ भव्य वेद संदेश यात्रा निकाली गई, जो विंध्य रेजीडेंसी तक गई। इसी दिन उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।

द्वितीय दिवस 14 सितम्बर : वेद व्याख्यान संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें देशभर से पधारे वैदिक विद्वानों ने वेदों की वैज्ञानिकता एवं प्रासंगिकता पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।

तृतीय दिवस 15 सितम्बर : ऋषि पंचमी के अवसर पर सम्पूर्ति सत्र सम्पन्न हुआ। सायंकाल माँ विंध्यवासिनी मंदिर प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भगवती का विशेष श्रृंगार-पूजन, दर्शन-अर्चन एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया।

आचार्य द्विवेदी ने बताया कि सम्मेलन की सफलता में महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष हरिहर रंजन शर्मा, सचिव प्रो. जगदीश पाल तथा विद्यालय समिति के सभी पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।

मीडिया से अपील करते हुए उन्होंने कहा, “वेदों की शिक्षा घर-घर हो, गाँव-गाँव हो। इसी परम्परा के अंतर्गत सभी धर्मावलंबी अपने बच्चों को वैदिक शिक्षा दें, जिससे पूरे भूमंडल में वैदिक परम्परा का संरक्षण-संवर्धन हो सके।”

अंत में आचार्य द्विवेदी ने माँ विंध्यवासिनी से प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी के हृदय में भगवान वेदनारायण की कृपा बनी रहे और धर्म की ध्वज पताका पूरे विश्व में फहरे। वेद की रक्षा ही देश की रक्षा है। जय माँ विंध्यवासिनी। उन्होंने सम्मेलन के कवरेज के लिए सभी मीडिया बंधुओं का आभार भी व्यक्त किया।

 

रिपोर्ट भोलानाथ यादव

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