गुंडा, लंपट, दंगाई…
एक दो कौड़ी की वामपंथी नचनिया (बुरा लगे तो ढाई कौड़ी की लगा लो) नाथ पंथ के सर्वोच्च धर्मगुरु, गोरक्षपीठाधीश्वर और देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री के लिए यह अनर्गल गाली गलौज कर के चली जाती है और उसके बाद भी इन अर्बन नक्सलियों का दावा है कि उन्हें आजादी नहीं है। आजादी की अति और क्या होगी?
इसकी राजनैतिक औकात यह है कि किसी पंचायत में प्रधानी का चुनाव लड़ जाय तो जमानत जब्त हो जाएगी। इसका अपना सगा बाप (राम जानें) तक इसका मुंह देखना नहीं चाहता। पर अहंकार इतना कि किसी को भी कुछ भी कह देगी…
ये वही अभद्र, फूहड़ लोग हैं जो दिखाने के लिए तो हाथ में किताब लेकर घूमेंगे, पर संवैधानिक तरीके से चुने हुए लोगों को गालियां देते फिरेंगे। भारत के टुकड़े करने के स्वप्न देखने वाले इन धूर्तों के लिए शांति के पुजारी हैं, चिकन नेक काटने की धमकी देने वाले इनके दिल के राजा हैं, बाकी दुनिया गुंडा…
अपने दो चार सौ चुने हुए समर्थकों के बीच में बाबा को गाली दे कर निकल जाने जैसी होशियारी करने वाले ये टुच्चे दूसरों को अभद्र बताते फिरते हैं, पर इनकी अपनी भाषा ऐसी कि गांव देहात की महिलाएं सुन लें तो झोंटा नोच लें। जिस व्यक्ति को यह गाली दे कर गई है, उस व्यक्ति ने अपने शासन काल में असंख्य स्त्रियों को जीने का आत्मविश्वास दिया है। जिन लोगों ने सत्ता की असली गुंडई और दंगाइयों को देखा है, वे जानते हैं कि योगी जी ने क्या बदला है।
अपने आप को पढ़ा लिखा बताने वाली यह कर्कशा कह रही है कि गोरखपुर बुद्ध के लिए जाना जाता है। इस गदहिया को कोई बताए कि गोरखपुर हजार साल पूर्व भी बाबा गोरखनाथ के लिए जाना जाता था और हजार वर्ष बाद भी उन्हीं के लिए जाना जाएगा।
एक पंक्ति बोलने भर में छह बार मुंह और आठ बार कूल्हा मटका कर राखी सावंत टाइप गाली गलौज करने से बिग बॉस या महेश भट्ट की फिल्म में इमरान हाशमी के अपोजिट रोल तो मिल सकता है, राजनीति में जगह नहीं बन सकती। आपको क्यों सुना जा रहा है यह आपके समर्थक भी जानते हैं और विरोधी भी…
खैर! याद रखा जाएगा…
Sarvesh Tiwari Shreemukh







