वाराणसी
वाराणसी की पावन धरा और मोक्षदायिनी माँ गंगा का तट, जहाँ हर शाम असीमित आस्था का सैलाब उमड़ता है, कई बार ऐसी घटनाओं का गवाह बनता है जो इंसानियत और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश करती हैं। सिंधिया घाट पर घटित एक ऐसी ही घटना ने साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ एक लिबास नहीं, बल्कि संकट के समय फरिश्ता बन जाने का दूसरा नाम है।
चंदौली के धर्मशाला रोड निवासी 40 वर्षीय सोनू गुप्ता, जो किसी कार्यवश सिंधिया घाट पर मौजूद थे, अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। मौत को अपने बेहद करीब पाकर जब उनकी सांसें थमने लगीं, उसी समय वहाँ तैनात 36वीं वाहिनी पी ए सी रामनगर वाराणसी के तीन प्रहरियों—मुख्य आरक्षी शिवरामकृष्ण जी गुप्त, आरक्षी जयप्रकाश सिंह और आरक्षी राजर्षि पाण्डेय—की चौकस निगाहें इस अनहोनी पर पड़ीं।

संकट की उस एक-एक सेकंड कीमती थी। बिना एक पल गंवाए, आरक्षी जयप्रकाश सिंह ने अपनी तत्परता का परिचय देते हुए फौरन लाइफ ब्वॉय रिंग सोनू की तरफ फेंकी। लेकिन स्थिति की नजाकत को भांपते हुए कि वह शख्स गहरे पानी में डूब चुका है, मुख्य आरक्षी शिवरामकृष्ण जी गुप्त ने अपनी जान की परवाह किए बिना खुद उफनती गंगा की लहरों में छलांग लगा दी।
उनकी यह साहसिक छलांग सिर्फ एक बचाव कार्य नहीं था, बल्कि कर्तव्य पथ पर जीने और मरने की कसम का जीवंत प्रमाण था। साथी आरक्षी राजर्षि पाण्डेय ने भी इस सामूहिक बचाव अभियान में पूरी मुस्तैदी के साथ मोर्चा संभाला।
इन तीनों जवानों के अदम्य साहस, बेहतरीन आपसी तालमेल और त्वरित सामूहिक प्रयास ने सोनू गुप्ता की बुझती हुई साँसों को वापस लौटा दिया। एक नागरिक की जिंदगी बचाकर इन खाकीधारी सूरमाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पुलिसकर्मी सिर्फ कानून के रखवाले नहीं होते, बल्कि जनता के रक्षक और समाज के सच्चे नायक होते हैं।
सिंधिया घाट के इन जांबाज जवानों—शिवरामकृष्ण जी गुप्त, जयप्रकाश सिंह और राजर्षि पाण्डेय—का यह पराक्रम और सूझबूझ भरा प्रयास संपूर्ण पुलिस विभाग और मानवता के लिए गर्व का विषय है।
ऐसे कर्मठ और समर्पित जवानों को हमारा शत-शत नमन!







