पीली नदी में मिला लापता युवक का शव, दूसरे की तलाश जारी; दो परिवारों की उम्मीदें अब मातम में बदलीं

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जौनपुर

शुक्रवार दोपहर अचानक लापता हुए दो युवकों की तलाश में जुटे परिजनों के लिए सोमवार की सुबह ऐसी खबर लेकर आई, जिसने पूरे परिवार को भीतर तक झकझोर दिया। पीली नदी में एक युवक का शव उतराता मिला, जिसकी पहचान गोरखनाथ (24) के रूप में हुई। वहीं उसका साथी मोनू (26) अब भी लापता है। और उसकी तलाश में पुलिस लगातार नदी व आसपास के इलाकों में अभियान चला रही है।

जानकारी के अनुसार थाना सिंगरामऊ क्षेत्र के ग्राम मल्लूपुर गनौली निवासी गोरखनाथ पुत्र रामआसरे और बछाड़ी तियरा निवासी मोनू पुत्र रामकुमार शुक्रवार 28 अगस्त की दोपहर करीब तीन बजे से अचानक लापता हो गए थे। दोनों के घर नहीं लौटने पर परिजनों की चिंता बढ़ती गई। परिवार और ग्रामीणों ने अपने स्तर से काफी तलाश की, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिल सका।

बताया जा रहा है। कि शुक्रवार शाम मोटरसाइकिल पुल के पास पुलिस को दोनों युवकों से जुड़ा अहम सुराग मिला था। इसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश तेज कर दी थी। लेकिन सोमवार सुबह पीली नदी में एक युवक का शव मिलने की सूचना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।

ग्रामीणों ने नदी में शव उतराता देखा तो तत्काल पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया। पहचान होने के बाद जब परिजनों को गोरखनाथ की मौत की खबर मिली तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। जिस बेटे के सकुशल लौटने की उम्मीद में परिजन कई दिनों से रास्ता देख रहे थे। वह अब दुनिया से हमेशा के लिए विदा हो चुका था।

घटना की सूचना पर उपजिलाधिकारी बदलापुर भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।

वहीं, गोरखनाथ के साथी मोनू का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है। पुलिस नदी और आसपास के संभावित स्थानों पर उसकी तलाश कर रही है। परिवार की निगाहें अब भी उसी उम्मीद से टिकी हैं। कि शायद मोनू सुरक्षित मिल जाए।

आखिर दोनों युवक पीली नदी तक कैसे पहुंचे। गोरखनाथ की मौत किन परिस्थितियों में हुई। और मोनू कहां है। इन सवालों का जवाब अभी रहस्य बना हुआ है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।

एक तरफ एक परिवार के घर में मातम पसरा है। तो दूसरी तरफ दूसरे परिवार की आंखें अब भी अपने लापता बेटे की राह देख रही हैं। पीली नदी की लहरों ने एक परिवार की उम्मीद छीन ली है। जबकि दूसरे परिवार की उम्मीदें अब भी उसी नदी के किनारे टिकी हुई हैं।

 

रिपोर्ट – सुरेश कुमार शर्मा

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