चन्दौली/चकिया।
विकास खंड शहाबगंज के ग्राम सभा सुल्तानपुर में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और सरकारी धन के बंदरबांट का गंभीर मामला सामने आया है।
गांव में चर्चा जोरों पर है कि ग्राम प्रधान राजेश और उनके कथित करीबी रामू चौहान की मिलीभगत से मनरेगा के नाम पर लाखों रुपये का खेल खेला जा रहा है।
कागजों में काम, हकीकत में सन्नाटा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा के अंतर्गत 27 मजदूरों को कार्यरत दिखाया गया है, जबकि मौके पर एक भी मजदूर कार्य करते नहीं मिला।
धरातल पर काम शून्य, लेकिन अभिलेखों में पूरा भुगतान – आखिर यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है?
एक ही फोटो बार-बार, NMMS से हेराफेरी?
ग्रामीणों का आरोप है कि एक ही स्थल की तस्वीरों को अलग-अलग तारीखों में अपलोड कर एनएमएमएस प्रणाली के माध्यम से उपस्थिति दर्ज दिखाई जा रही है। यदि यह आरोप सत्य है तो यह न केवल सरकारी धन की सीधी हानि है, बल्कि योजना की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिन्ह है।
असली मजदूरों के हक पर डाका।
बताया जा रहा है कि वास्तविक पात्र मजदूरों को काम नहीं मिल रहा, जबकि फर्जी नामों पर भुगतान किया जा रहा है। मनरेगा जैसी योजना, जो गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है, उसी में यदि इस प्रकार की अनियमितता हो रही है तो जिम्मेदार कौन?
सोशल ऑडिट की उठी मांग।
ग्रामीणों ने मनरेगा के पूर्व और वर्तमान सभी कार्यों की स्वतंत्र एवं पारदर्शी सोशल ऑडिट की मांग की है। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो कई परतें खुल सकती हैं और संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
पूरा मामला विकास खंड शहाबगंज, जनपद चन्दौली के ग्राम सभा सुल्तानपुर का बताया जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर कब संज्ञान लेता है और क्या वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला दबा दिया जाता है।







