प्रदेश भर में मिडिया के माध्यम से प्रतिदिन गरीब, असहाय और पीड़ित परिवार की दर्दनाक कहानियां सामने आ रही है। कही जमीन पर कब्जा तो कही धोखाधड़ी कही पुलिसिया उदासीनता तो कही प्रशासनिक लापरवाही के कारण गरीब परिवार दर दर भटकने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है। कि इतने खबरें प्रकाशित होने के वावजूद जिला प्रशासन पूरी तरह से मौन साधे बैठी है। पत्रकार तो अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए लगातार गरीबों की आवाज को अखबारों पोर्टलों चैनलों के माध्यम से सरकार तक पहुंचा रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर न तो जांच हो रहा है। और न ही पीड़ित को न्याय मिल पा रहा है।
इससे यह सवाल उठना लाजिमी है। कि क्या जिला प्रशासन सिर्फ फाइलों और बैठकों तक सीमित रह गया है। गरीबों का कहना है। कि जब मीडिया में हमारी पीड़ा छप जाती है। तब हमें एक उम्मीद होती है। कि अब शायद कोई सुनवाई होगी। लेकिन दिनों दिन हालात बद से बद्तर होते जा रहे हैं। यह स्थिति न केवल लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की अनदेखी हैं। बल्कि मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी मंशा पर भी सवाल खड़े करती है।
अब समय आ गया है। कि मुख्यमंत्री स्वयं इन मामलों को अपने संज्ञान में लेते हुए जिला अधिकारियों से जबाव तलब करें। और यह सुनिश्चित करें। कि हर एक प्रकाशित खबर पर तत्काल जांच हो और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो। पीड़ित गरीब परिवार को समय बध्द न्याय और राहत मिले। यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा तो जनता का भरोसा शासन व्यवस्था से विश्वास उठना तय है। गरीबों की चुप्पी को उनकी मजबूरी समझने कि भूल न की जाएं अब न्याय होना ही चाहिए।







