लखनऊ
प्रसिद्ध उर्दू संस्था “सिलसिला अदब का” के द्वारा शेरोज़ कैफे गोमती नगर में आयोजित प्रसिद्ध शायरा साजिदा सबा के काव्य संग्रह “किचन से क़लम तक” पर चर्चा के दौरान डॉ.मिर्ज़ा शफीक हुसैन शफ़क़ ने अपने अध्यक्षता भाषण में कहा कि साजिदा सबा की कविता का मुख्य विषय सौंदर्य, प्रेम और दुःख है। ये तीन भावनाएँ मानव जीवन का सार हैं और साजिदा सबा ने अपनी कविता में इन तीन भावनाओं को बेहतरीन ढंग से व्यक्त किया है…
प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता ताहिरा हसन ने साजिदा सबा की शायरी को उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए कहा कि साजिदा की शायरी में समसामयिक मुद्दों को बेहद खूबसूरती से पेश किया गया है, नय्यर उमर ने साजिदा सबा की शब्द प्रणाली पर गहन शोधपत्र प्रस्तुत किया।
इस प्रतिष्ठित साहित्यिक कार्यक्रम में साजिदा सबा, आमिर फारूकी, उमैर मंज़र, ताज रिज़वी और हिना रिज़वी और अन्य लेखकों और कवियों ने भी “किचन से क़लम तक” और सोहेल आज़ाद की पुस्तक “ग़ज़ल लेखन एक परिचय” पर अपनी बहुमूल्य राय व्यक्त की।
साजिदा सबा ने चर्चा के संचालन का दायित्व बड़ी शालीनता से निभाया। इस शुभ अवसर पर एक काव्य पाठ का भी आयोजन किया गया जिस में ताज रिज़वी, हिना रिज़वी, साजिदा सबा, आमिर फ़ारूक़ी, मालविका हरिओम, अहमद फ़राज़, हशीम फ़ारूक़ी ने अपनी ग़ज़लों से श्रोताओं का मनोरंजन किया। काव्य पाठ का संचालन राजकीय हुसैनाबाद कॉलेज के उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ.मिर्ज़ा शफीक हुसैन शफ़क़ ने अपने मख्सूस अंदाज में किया।
मुख्य अतिथि के रूप में शेहला हक और आरिफ जुबैर ने शिरकत की,कविता पाठ के अंत में, “सिलसिला अदब का” की अध्यक्ष साजिदा सबा ने अतिथियों को “सिलसिला अदब का” के सुंदर स्वर्ण अक्षरों से सम्मानित किया और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विशेष रूप से अज़रा नजम, इमराना अज़मत, फरहीन इकबाल, तरन्नम असगर, सईदा आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला











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