चन्दौली
धान का आभासी कंडुआ रोग एक फफूंदजनित रोग है जो धान की प्रारंभिक अवस्थाओं में नही प्रदर्शित होता है परन्तु जब धान की बालियों निकलती है तब उसकी बालियों में धान के दाने की जगह उसमें पीले या काले रंग के पाउडर भरे दिखाई पड़ते है.
प्रबन्धन / उपचारः-
जब फूल की अवस्था में वातावरण में आद्रता 90 प्रतिशत से अधिक और तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास होता है तब यह रोग बहुत ही तेजी से फैलता है. ऐसी उपयुक्त दशा बनने के कारण भी जनपद के किसानों को इस रोग का दंश झेलना पड़ रहा है परन्तु किसान भाई किसी न किसी कारण से निम्नलिखित प्रक्रियायों से चूक जा रहे हैं-

1. गर्मी की गहरी जुताई अवश्य करना चाहिए।
2. किसान भाईयों को बार बार सलाह दी जाती है कि आप अपने बीज का शोधन स्यूडोमोनास फ्लूरोसेन्स / ट्राइकोडर्मा 10 ग्राम/किलो बीज की दर से बीज शोधन करना चाहिए या एक हेक्टाएर विचड़ो के लिए बिचड़ो को 100 लिटर पानी में 2.5 किलो स्यूडोमोनास फ्लूरोसेन्स/ट्राइकोडर्मा की मात्रा मिलाकर बिचड़ो 30 मिनट तक रखे फिर रोपाई करनी चाहिए ।
3. उर्वरक के अत्याधिक उपयोग से बचना चाहिए।
4. फसल चक्र अपनाना चाहिए.
5. बाली निकालने की अवस्था में प्रोपिकोनाजोल 25% इसी या पिकाक्सीस्त्रोम्बीन 7.05% + प्रोपिकोनाजोल 11.7% एससी की एक लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोल बनाकर एक हेक्टयर की दर से छिडकाव करना चाहिए
।
रिपोर्ट – अलीम हाशमी











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