चन्दौली चहनिया
जल संरक्षण के लिए अपना जीवन समर्पित कर देने वाले जल पुरुष के नाम से विख्यात बीएचयू के इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अशोक कुमार सोनकर ने एक दो राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया, जिससे लोग जल संरक्षण के प्रति सचेत हों।
बकौल जल पुरुष अशोक सोनकर जल है तो कल है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए जल पैदा करने वाले इसके जल श्रोतों जैसे नदी, पोखरी, तालाब, कुंए आदि का संरक्षण किया जाना चाहिए। जल को आज भी मनुष्य निर्मित नहीं कर सकता, इसलिए यह अनमोल है।
जल संरक्षण के महत्व को आम जनमानस तक पहुंचाने के लिए ही राष्ट्रीय सेमिनार करके देश भर के विद्वानों को बुलाकर इस पर चर्चा की गई। जिसमें सभी ने एक स्वर से यह स्वीकार किया कि यदि जल को बचाया नहीं गया तो अगला विश्व युद्ध जल के लिए ही होगा।
विदित हो कि पिछले दस सालों से काशी के कुंडों तालाबों की स्वयं सफाई करके उसे पशु पक्षियों के पीने योग्य बना रहे हैं। जल संरक्षण के प्रति इनके सशक्त किरदार को देखते हुए काशी की जनता ने इन्हें जल पुरुष और वाटरमैन ऑफ काशी का नाम दिया है।











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