मीरजापुर के जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत पंकज जी महाराज अपनी शाकाहार-सदाचार, मद्यनिषेध और आध्यात्मिक-वैचारिक जनजागरण यात्रा के तहत मड़िहान और पहाड़ी क्षेत्र के 46वें पड़ाव ग्राम डीबरा (नगहट दाढ़ीराम ) पहुंचे। यहाँ आयोजित सत्संग संदेश में उन्होंने कहा कि संतों और महापुरुषों के सत्संग में कभी किसी की निंदा या आलोचना नहीं की जाती, बल्कि वहाँ केवल भगवान की भक्ति की प्रेरणा दी जाती है।
जिस प्रकार दुनिया का ज्ञान विद्यालयों में मिलता है, उसी प्रकार अध्यात्मवाद और रूहानियत की शिक्षा संतों के सत्संग से प्राप्त होती है।माया-मोह में उलटी आत्मा और सद्गुरु की महिमा महाराज ने कहा कि सभी आत्माएं प्रभु के देश से आई थीं, किंतु यहाँ आकर माया-मोह और दुनिया के कार्यों में उलझ जाने के कारण उनका संबंध आंतरिक शब्द से टूट गया। आज मनुष्य यह भूल चुका है

कि वह इस शरीर में कैसे आया और अपने अजर-अमर सच्चे वतन कैसे पहुँचेगा। इस आंतरिक भेद को केवल संत सद्गुरु ही बता सकते हैं। भगवान ने सभी मनुष्यों को एक समान बनाया है, अतः हवा और पानी की तरह भगवान का भी कोई बँटवारा नहीं है।
मनुष्य अपने कर्म करने में तो स्वतंत्र है, परंतु उनका फल भोगने में परतंत्र है। जीवन की सबसे बड़ी पूँजी सद्गुरु की प्राप्ति है, जो साधक को सुरत-शब्द योग यानी नाम-योग साधना की युक्ति बताकर उसे त्रिकालदर्शी बना देते हैं।
शाकाहार और नशामुक्ति से समाज का निर्माण शाकाहार और सदाचार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि “जैसा खाए अन्न, वैसा होये मन” के अनुसार मानव एक शाकाहारी प्राणी है, लेकिन पशु-पक्षियों की हिंसा करने से समाज में हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ती है। इसलिए सभी को शाकाहार अपनाना चाहिए और शराब जैसे नशीले पदार्थों का त्याग कर एक अच्छे समाज के निर्माण में सहयोग करना चाहिए।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष घूरन प्रसाद, संगठन मंत्री व प्रवक्ता मोती लाल सिंह, राम विलास, दुर्गा प्रसाद, अमरनाथ यादव, इन्द्रपाल, पप्पू प्रजापति सहित संतकबीरनगर की संगत और स्थानीय कार्यकर्ताओं का विशेष सहयोग रहा।








