वाराणसी
रोहनिया थाना क्षेत्र के खनाव गांव स्थित वर्सोवा हॉस्पिटल में भर्ती 63 वर्षीय महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतका की पहचान खनाव गांव के प्रधान सुरेंद्र राजभर की माता दुर्गावती देवी के रूप में हुई है। दुर्गावती देवी के छह बेटे और तीन बेटियां हैं। घटना के बाद परिवार में मातम का माहौल है।
परिजनों के मुताबिक, दुर्गावती देवी को करीब चार दिन पहले वायरल फीवर की शिकायत के बाद वर्सोवा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान उनकी हालत में सुधार दिखाई दे रहा था। यहां तक कि उन्होंने एक दिन पहले खिचड़ी भी खाई थी। परिवार के अनुसार, मंगलवार को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने की उम्मीद थी।
मृतका के भतीजे रविंद्र राजभर का आरोप है कि मंगलवार सुबह अचानक दुर्गावती देवी को सांस लेने में परेशानी हुई। उन्होंने कथित तौर पर नर्स से ऑक्सीजन हटाने के लिए कहा। रविंद्र राजभर का आरोप है कि इसके बाद नर्स ने उनकी बड़ी माता के हाथ-पैर बांध दिए। इसी दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई।
रविंद्र राजभर ने अस्पताल की व्यवस्था और इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मरीज को डिस्चार्ज किया जाना था और एक दिन पहले तक उन्होंने खाना भी खाया था, तो अचानक उनकी मौत कैसे हो गई। उनका आरोप है कि यदि समय रहते उचित चिकित्सा व्यवस्था और देखभाल की जाती तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज तथा इलाज से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि जांच में यदि अस्पताल या किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल महिला की मौत के वास्तविक कारण और अस्पताल स्टाफ की भूमिका को लेकर स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अस्पताल प्रबंधन की ओर से लगाए गए आरोपों पर तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।







