गोरखपुर
इंडियन ह्यूमन राइट्स विंग्स के अध्यक्ष इंजीनियर बृजमोहन के नेतृत्व में उर्दू के सुप्रसिद्ध शायर अंतर्राष्ट्रीय पटल पर गोरखपुर शहर का परचम लहराने वाले रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी की 130 वीं जयंती के अवसर पर युवा कवि एवं शायर मिन्नत गोरखपुरी की उपस्थिति में शहर के युवा कवियों, शायरों एवं समाजसेवीयों ने बेतियाहाता स्थित फिराक चौक पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करके श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी एवं साहित्य प्रेमी सरदार जसपाल सिंह ने की उन्होंने कहा कि गोरखपुर ही नहीं देश को फक्र है फ़िराक़ गोरखपुरी पर तथा उन्हें ‘गोरखपुर का चमकता सितारा’ कहकर याद किया।
मिन्नत गोरखपुरी ने कहा कि फिराक तबीयत से बागी थे। मगर उनका एक पक्ष नेकदिली और जिंदादिली भी था, जिसकी तस्दीक उनकी शायरी में सहज ही होती है। यही वजह है कि वह उर्दू शायरी के ऐसे अजीम शायर के रूप में मशहूर हुए, जिन्होंने उर्दू गजल के क्लासिकीय मिजाज में बिना किसी छेड़छाड़ के नए लहजे की शायरी कर अद्भुत मिसाल पेश की। उन्होंने अपने नाम के आगे गोरखपुरी जोड़कर गोरखपुर को अदब की दुनिया में अमर कर दिया।
पूजा गुप्ता ने कहा कि उनका हर एक अंदाज अनूठा था, हर किसी के लिए। मुशायरों और आयोजनों में खास अंदाज में उनकी शिरकत उस दौर के लोगों को शायद ही कभी भूल सकती है। फिराक आज हमारे बीच भले ही नहीं हैं पर उर्दू अदब का नाम आते ही उनकी अलमस्त और बेलौस शख्सियत जेहन में तैरने लगती है। फिराक साहब बागी तेवर के साथ ही जिंदादिली व नेकदिली के भी मिसाल रहे। इन्हीं वजहों से वह उर्दू शायरी के अजीम शायर के रूप में न केवल मशहूर हुए बल्कि एक ऐसे मुकाम पर पहुंचे जहां हर शायर को पहुंचने की ख्वाहिश होती है।
समाजसेवी एवं साहित्यप्रेमी इंजीनियर बृजमोहन ने कहा कि फिराक से जुड़ी तमाम यादें हैं गोरखपुर की फिजाओं में। शायरी का अंदाज, चुटकी बजाकर सिगरेट झाडऩा, बड़ी-बड़ी आंखें फैलाकर अपनी बातों को पूरी मजबूती से रखना, वर्ड्सवर्थ को पढ़ते-पढ़ते शायरी करने लगना। ‘आने वाली नस्लें तुम पर फख्र करेंगी हम-असरों, जब भी उनको ध्यान आएगा तुमने फिराक को देखा है।’ मशहूर शायर रघुपति सहाय उर्फ फिराक गोरखपुरी की कलम से लिखीं ये पंक्तियां आज काफी कुछ हकीकत सी बयां करती हैं। उर्दू अदब की दुनिया में जिन नामों ने गोरखपुर को राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, उनमें फिराक साहब का नाम सबसे पहले और पूरे अदब के साथ लिया जाता है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अनुराग मझवार गौतम गोरखपुरी उत्कर्ष पाठक उत्पल अभिषेक शर्मा मोहम्मद अब्दुल्ला एडवोकेट मिनहाज सिद्दीकी सुशील सिंह ने अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित किया |
अंत में कार्यक्रम के संयोजक गौतम गोरखपुरी ने सभी को अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया ।
रिपोर्ट : जगदीश शुक्ला










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