जौनपुर
नशे के खिलाफ जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. की अध्यक्षता में हुई एनसीओआरडी की बैठक में सख्त निर्देश दिए गए हैं। स्कूल-कॉलेजों के आसपास पान-गुटखा की दुकानों पर निगरानी और नशीले पदार्थों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की तैयारी है।
लेकिन सवाल सिर्फ पान-गुटखे तक सीमित नहीं होना चाहिए। जिस तरह विद्यालय बच्चों के भविष्य का मंदिर हैं। उसी तरह धार्मिक स्थल समाज की आस्था का केंद्र हैं। तो फिर इनके आसपास शराब, भांग या अन्य नशीले पदार्थों की दुकानें आखिर क्यों हों।
प्रशासन यदि वास्तव में नशामुक्त जौनपुर” का संकल्प धरातल पर उतारना चाहता है। तो स्कूलों और मंदिरों के आसपास नशीली वस्तुओं की बिक्री पर सख्त और प्रभावी रोक भी अभियान का अहम हिस्सा बननी चाहिए।
नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल छापेमारी से नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य, परिवारों की खुशहाली और समाज की आस्था की रक्षा से पूरी होगी।
जनता का सवाल साफ है।
जहां शिक्षा और आस्था का दीप जलता है। वहां नशे का अंधेरा क्यों।
रिपोर्ट – सुरेश कुमार शर्मा







