चन्दौली पड़ाव
स्थानीय बहादुरपुर स्थित कामाख्या निवास के प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण की कथा के तृतीय दिवस की कथा में व्यास पीठ से पुराणवक्ता अखिलानंद जी महाराज ने शिवलिंग की महिमा का वर्णन कर श्रोताओं को भाव -विभोर कर दिया ।
महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति श्रवणादि कार्यों में असमर्थ हैं वह भगवान शिव के लिंग एवं मूर्ति की स्थापना कर उसकी विविध राजोपचारों से पूजा करेंगे तो इस असर संसार सागर से मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं ।

उन्होंने कहा कि शिवलिंग की पूजा अर्चना के प्रभाव से बड़े-बड़े सिद्ध संत एवं तपस्वी भी भव बंधन से मुक्त हो गए । भगवान शिव की पूजा सर्वत्र मूर्ति में तथा लिंग में अर्थात दोनों में की जाती है । महाराज जी ने कहा कि एक शिव ही ब्रह्म रूप होने से निराकार कहे जाते हैं ।
रूपवान होने के कारण कला सहित भी है इसलिए वे सकल और निष्कल दोनों हैं । सरकार तथा निराकार दोनों होने के कारण वे ब्रह्म शब्द से कहे जाने वाले परमपिता परमात्मा है । और यही कारण है की लोग भगवान शिव की पूजा लिंग रूप तथा मूर्ति रूप में अर्थात दोनों ही रूपों में करते हैं ।

शिव से भिन्न जो दूसरे देवता हैं वह साक्षात ब्रह्मा नहीं है । इसलिए कहीं भी उनके लिए निराकार लिंग नहीं उपलब्ध होता । शिव ही ॐ रूप से प्रकाशित होते हैं । महाराज जी ने शिवलिंग की उत्पत्ति के संबंध में कहा कि जब महाप्रलय हो चुका था उस समय ब्रह्मा और विष्णु के मध्य घनघोर युद्ध हुआ था ।
और उन सबके अहंकार को दूर करने के लिए उनके बीच में निराकार परमेश्वर शिव जी ने लिंग रूप से प्रकट होकर अपने रूप का दर्शन कराया था । उसी दिन से ब्रह्मांड में शिव जी का निष्कल लिंग प्रसिद्ध हुआ । कथा में मुख्य यजमान के रूप में कांति जायसवाल एवं शेखर जयसवाल व निधि जायसवाल रहे ।
मौके पर अनिल गुप्ता (गुड्डू) , ओमप्रकाश जायसवाल ,बबीता जायसवाल ,यज्ञ नारायण सिंह ,अजय राठौर ,पूनम सिंह ,खुशबू जायसवाल ,अंजलि राठौर ,संतोष पाठक ,नरेंद्र मिश्रा , कौशांबी ,आलोक ,शिवम ,कौशल पाठक ,विवेक ,सुधांशु सिंह ,संदीप ,वीरेंद्र सहित सैकड़ो श्रोताओं ने कथा का रसास्वादन किया।











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