केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने देश के युवाओं के नाम एक भावुक पत्र जारी किया है। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि पिछले चार दशकों से वे छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं तथा उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की आधारशिला है।
धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 में सामने आई अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच CBI को सौंपी, परीक्षा रद्द की और अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का फैसला लिया।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों के लिए परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन कराया गया।
अपने पत्र में उन्होंने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस मामले की जिम्मेदारी ली और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया की वजह से प्रभावित न हो।
हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और व्यवस्था में बाधा डालने की कोशिश की, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से पीड़ा हुई।
जंतर-मंतर और देशभर में बने हालात का जिक्र करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वे नहीं चाहते कि राष्ट्र विरोधी ताकतें इस स्थिति का लाभ उठाएं या किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी और राजनीतिक विवादों में उलझे।
उन्होंने छात्रों से पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित करने की अपील करते हुए बताया कि इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपने का निर्णय लिया।
पत्र के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों और देशवासियों का आभार व्यक्त किया तथा कहा कि वे भविष्य में भी राष्ट्रसेवा और युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समर्पित रहेंगे।











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