मीरजापुर, 26 जुलाई।
लोक संस्कृति संरक्षण केंद्र की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को बिसुंदरपुर स्थित ट्रांजिट हॉल में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता संस्था की संस्थापिका उषा गुप्ता ने की। बैठक दोपहर 2:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक आयोजित हुई, जिसमें लोक संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए संस्थापिका/निदेशक श्रीमती उषा गुप्ता ने कहा कि भारतीय लोक संस्कृति हमारी अमूल्य धरोहर है। कजरी, बिरहा, आल्हा एवं अन्य लोक विधाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने बताया कि 22 अगस्त 2026 को सिटी क्लब, मीरजापुर में जनपद एवं आसपास के जिलों के लोक कलाकारों की सहभागिता से भव्य कजरी महोत्सव आयोजित किया जाएगा।
संस्था के संरक्षक एवं जिला सूचना अधिकारी ओम प्रकाश उपाध्याय ने कहा कि मीरजापुर की कजरी देश-विदेश में अपनी अलग पहचान रखती है। लोक कलाकारों को सम्मान और मंच उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।
विष्णुकांत पांडेय ने कहा कि लोक संस्कृति हमारी पहचान है। यदि हम अपनी लोक परंपराओं को सहेजेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियाँ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहेंगी।
विजय दुबे ने कहा कि कजरी महोत्सव जैसे आयोजन जनपद की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।संदर्भ पांडेय ने कहा कि लोक कलाकारों को निरंतर अवसर और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
संतोष श्रीवास्तव ने कहा कि लोक संस्कृति केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का आधार है। इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।प्रसिद्ध लोक गायक जटाशंकर चौलर ने कहा कि कजरी मीरजापुर की आत्मा है। युवा पीढ़ी को लोक संगीत से जोड़ने के लिए नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रम होने चाहिए।
लोक गायक सुरेश मौर्य ने कहा कि लोक कलाकारों को मंच मिलने से उनकी कला को नई पहचान मिलती है।राम नारायण यादव ने कहा कि ग्रामीण अंचलों में छिपी लोक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना सराहनीय प्रयास है।
महेंद्र कुमार ने संस्था द्वारा लोक संस्कृति के संरक्षण के प्रयासों की सराहना की।सूरज दुबे ने युवाओं से लोक कला एवं लोक संगीत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।अनूप तिवारी ने कहा कि कजरी महोत्सव जनपद के कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगा।
घनश्याम ओझा ने कहा कि विद्यालयों में भी लोक संस्कृति, लोकगीत एवं लोक कलाओं से जुड़े कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होने चाहिए, जिससे बच्चों में अपनी विरासत के प्रति सम्मान और जागरूकता विकसित हो।
बैठक के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों ने आगामी कजरी महोत्सव-2026 को सफल, भव्य एवं ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया। अंत में उषा गुप्ता ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।











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