गोरखपुर
यूपी के गोरखपुर की पुलिस ने दो शातिर साइबर फ्राड को गिरफ्तार किया है। ये साइबर जालसाज फर्जी लोन कंपनी बनाकर देशभर के लोगों से साइबर ठगी करते थे। फाइनेंस कंपनी में नौकरी दिलाने के नाम पर खाता खुलवाते थे। फिर उनका अकाउंट ATM अपने पास रख लेते थे। देश -विदेश से उस खाते में पैसे मांगाते थे और ATM के जरिए निकाल लेते थे।
गोरखपुर की कोतवाली पुलिस ने मंगलवार की सुबह बिहार के नवादा और कुशीनगर जिले के दो आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से छह मोबाइल फोन, 10 एटीएम कार्ड, छह सिम कार्ड और 1500 रुपये बरामद किए।गिरोह का सरगना मंजीत बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र है, जबकि दूसरा विजय आइटीआइ पास है। गिरोह का सदस्य वशिष्ठ तिवारी अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
.पकड़े गए फ्रांडो से पुलिस पूछताछ में पता चला कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान नवादा (बिहार) के वारसलीगंज स्थित बाली निवासी मंजीत कुमार व कुशीनगर जिले के अहिरौली स्थित बेलवा बुजुर्ग निवासी विजय विश्वकर्मा है।चार माह पहले जालसाजों ने जानवी श्रीवास्तव नाम की युवती को फाइनेंस कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपने साथ जोड़ लिया। उसके नाम पर सिम कार्ड निकलवाया गया और यूको बैंक में खाता खुलवाकर एटीएम कार्ड, सिम और बैंकिंग दस्तावेज अपने कब्जे में रख लिए।
इसके बाद उसी खाते में देशभर के लोगों से लोन दिलाने के नाम पर रकम मंगाई जाने लगी। जांच में सामने आया कि जानवी के खाते में 15 लाख रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन हुआ। बैंक खाता फ्रीज होने के बाद उसे ठगी का एहसास हुआ और उसकी शिकायत पर कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।पूछताछ में मंजीत ने बताया कि वह इंटरनेट मीडिया पर फर्जी लोन कंपनी का पेज और मोबाइल एप बनाकर कम ब्याज पर लोन दिलाने का विज्ञापन चलाता था। मेटा (फेसबुक) एड के जरिए लोगों तक पहुंच बनाई जाती थी। आवेदन करने वालों को कंपनी का कर्मचारी बनकर फर्जी पहचान पत्र भेजा जाता था, जिससे वे विश्वास में आ जाएं।
इसके बाद रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग और इंश्योरेंस शुल्क के नाम पर बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती थी। पैसा खाते में आते ही एटीएम से निकाल लिया जाता और पीड़ित का मोबाइल नंबर ब्लाक कर दिया जाता था।पुलिस जांच में सामने आया कि विजय विश्वकर्मा 10 प्रतिशत कमीशन लेकर लोगों के बैंक खाते खुलवाता था। उसने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों से 15 बैंक खाते खुलवाए, जिनमें साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती थी।
.देश विदेश से आए रकम को एटीएम से नकदी निकालकर गिरोह के सदस्यों में बांट दी जाती थी। लगातार साइबर अपराध में इस्तेमाल होने के कारण इनमें से कई खाते विभिन्न एजेंसियों ने फ्रीज कर दिए हैं। इससे वे लोग भी परेशानी में हैं, जिन्होंने लालच या अनजाने में अपने बैंक खाते उपलब्ध करा दिए थे।पुलिस के अनुसार, गिरोह कोतवाली क्षेत्र में किराये का कमरा लेकर संचालन कर रहा था। कोतवाली क्षेत्र का रहने वाला वशिष्ठ तिवारी फरार है। उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि गिरफ्तार मंजीत पेशेवर साइबर अपराधी है। वह दो बार जेल जा चुका है। वर्ष 2023 में गोरखपुर साइबर थाने में हल्दीराम की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर ठगी करने के मामले में भी जेल भेजा गया था।नवादा (बिहार) में भी उसके खिलाफ साइबर अपराध के मुकदमे दर्ज हैं।
वह बार-बार ठिकाने बदलता रहता था। पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और बैंकिंग रिकार्ड की फोरेंसिक जांच करा रही है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और कुल कितनी रकम का लेनदेन किया।
सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने बताया कि साइबर जालसाज फर्जी तरीके से फाइनेंस कंपनी में नौकरी दिलाने के नाम पर खाता खोलवाते थे। खाता खुलने के बाद उनका ATM और बैंक अकाउंट लेकर उस खाते से पैसे निकाल लेते थे। ऐसे दो शातिर साइबर जालसाज को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है।











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