राजातालाब
आराजीलाइन के भवानीपुर गांव में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने “खेत बचाओ अभियान” के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम किया।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैव-उर्वरकों के उपयोग और सतत कृषि तकनीकों की जानकारी दी। डॉ. गोविंद पाल ने मृदा की उर्वरा शक्ति बनाए रखने पर बल दिया। डॉ. नीरज सिंह ने मृदा के लाभकारी सूक्ष्मजीव और आईआईवीआर द्वारा विकसित उत्पादों के प्रयोग से रासायनिक उर्वरक की बचत बताई। डॉ. मोहम्मद शाहिद ने संतुलित पोषण के लिए मृदा परीक्षण और नमूना लेने की सही विधि दिखाई। हरी खाद के फायदे भी समझाए गए।
किसानों को बैक्टीरियल एनपीके जैव-उर्वरक ‘काशी एज़ोबीसी-पी’, ‘काशी एज़ोबीसी-एल’ और ट्राइकोडर्मा ‘काशी बायोडर्मा’ वितरित किए गए। संतुलित पोषक तत्व, जैव उर्वरक और मृदा नमूना विधि पर पत्रक भी दिए गए।संवाद सत्र में किसानों ने मृदा उर्वरता और जैव उर्वरक से जुड़ी समस्याओं पर वैज्ञानिकों से सवाल पूछे। कार्यक्रम में 58 किसान शामिल हुए, जिनमें 34 महिलाएं थीं। किसानों ने खेती में उन्नत तकनीक अपनाने का संकल्प लिया।











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