चन्दौली सकलडीहा
क्षेत्र में पिछले कई दिनों से नहर सूखने के कगार पर है जिससे धान की नर्सरी डालने में किसानों को परेशानी उत्पन्न हो रही है। वहीं किसान मनोज, संजय, अवधेश ने बताया कि अगर समय से नहर में पानी नहीं प्राप्त हुई तो धान की नर्सरी डालने में देर हो जाएगी, जिससे धान की फसल बिछड़ने की आशंका जाहिर हो रही है।
वहीं अगर समय से धान की नर्सरी नहीं पड़ी तो आगे चलकर और भी समस्या उत्पन्न होगी। वहीं किसानों ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा अगर नहर में पानी छोड़ दी जाती तो काफी किसानों द्वारा धान की नर्सरी डालने का कार्य संपन्न हो जाएगा।
वहीं कुछ दिनों बाद जब बारिश का समय प्रारंभ होगा तो इन नर्सरी को निकाल कर खेतों में लगाने से फसल अच्छी होती है तथा पैदावार भी बढ़िया होगा। भीषण गर्मी और चढ़ते पारे के बीच धान की बुवाई का समय नजदीक आ गया है, लेकिन क्षेत्र की नहरों में पानी न होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र की शुरुआत के साथ ही धान की नर्सरी (बेहन) डालने का काम शुरू हो जाता है, लेकिन सिंचाई विभाग की लापरवाही और सूखी नहरों ने इस प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया है।
वही कुछ नहरों में धूल उड़ रही है, जिससे किसान अब पूरी तरह निजी नलकूपों (ट्यूबवेल) पर निर्भर हो गए हैं। जिन किसानों के पास खुद का नलकूप नहीं है, उन्हें भारी कीमत चुकाकर पानी खरीदना पड़ रहा है। इससे धान की खेती की लागत शुरूआती दौर में ही बढ़ गई है। स्थानीय किसान नेता पिंटू पाल ने बताया कि विभाग हर साल वादा करता है, लेकिन वक्त पर पानी कभी नहीं मिलता। अगर यही हाल रहा तो धान की फसल लगाना घाटे का सौदा साबित होगा।
जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से मांग की है कि टेल (नहर के अंतिम छोर) तक तुरंत पानी पहुंचाया जाए, ताकि मानसून से पहले धान की नर्सरी तैयार की जा सके।











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