वाराणसी।
चालू वर्ष की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ दीवानी न्यायालय परिसर में शनिवार को जनपद न्यायाधीश संजीव शुक्ला द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोक अदालत भारत के संबंध में कोई नया विषय नहीं है। लोग आदिकाल से ही पंचायत व्यवस्था या इससे पूर्व की व्यवस्थाओं में, आपसी बातचीत व परस्पर सामंजस्य से समझौते तक पहुंचते का प्रयास करते रहें हैं। सन्
1987 के अधिनियम के द्वारा हमारी उसी व्यवस्था को विधिक पहचान दे दी गयी।
जिला जज संजीव शुक्ला ने कहा कि लोक अदालत एक ऐसा माध्यम बनकर उभरा है, जिससे हम अपना समय गवायें बिना गंभीर से गंभीर मामलों में निस्तारण तक पहुंच सकते हैं। पारिवारिक मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार समाज की ईकाई है, ऐसी स्थिति में न्यायालय की भूमिका पारिवारिक समरसता बनाने के परिप्रेक्ष्य में बहुत महत्वपूर्ण है।

जिला जज ने कहा कि न्यायालय का कार्य वास्तव में परिवारों को जोड़ना है न कि तोड़ना
है।राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद न्यायालय से कुल 33807 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमें कुल मिलाकर 2,96,86,619.81 मात्र धनराशि की बसूली की गयी तथा प्रशासन एवं अन्य विभागों द्वारा कुल 438354 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमे रू-17,52,54,475.00 मात्र की धनराशि की वसूली हेतु समझौता हुआ। न्यायालय तथा प्रशासन के सभी विभागों से कुल मिलाकर 4,72,161 वादों का निस्तारण हुआ जिसमें कुल रू0-20,49,41,094.81 मात्र का वसूली किया गया।
कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय- अनिरूद्ध कुमार तिवारी, पीठासीन अधिकारी, मोटर दावा एवं दावा अधिकरण-रामकेश, बनारस बार के अध्यक्ष-विनोद कुमार शुक्ला व सेन्ट्रल बार के अध्यक्ष- प्रेम प्रकाश गौतम एवं अपर जिला जज/राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी (न्यायिक)-आलोक कुमार, मुख्य राजस्व अधिकारी/राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी (प्रशासनिक )-अजीत कुमार, यूनियन बैंक के एलडीएम-अविनाश अग्रवाल व राजीव मुकुल पाण्डेय पूर्णकालिक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया के जी०एम०-बी०एन० सिंह तथा सभी न्यायिक अधिकारीगण व बैंक के कर्मचारीगण उपस्थित रहें।











Users Today : 0
Users This Year : 24718
Total Users : 37311
Views Today :
Total views : 73438