चन्दौली चकिया क्षेत्र के गांव भटवारा खुर्द राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय सफेद हाथी बने हुए हैं। मोटा वेतन लेने वाले डाक्टर चिकित्सालय से गायब रहते हैं। इससे मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है।
चकिया क्षेत्र के सटे भटवारा कई गांव में मरीजों को आयुर्वेदिक उपचार की सुविधा देने के लिए अस्पताल संचालित है लेकिन वहां पर तैनात चिकित्सक अस्पताल से नदारद रहते हैं जिसके कारण मरीजों को निजी चिकित्सकों से उपचार कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस स्थित में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में डाक्टरों के नहीं पहुंचने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अस्पताल सिर्फ शोपीस संचालित कर रहे हैं।
अशोक कुमार, देवेन्द्र सिंह, राजीव, कुमरपाल मरीजों ने बताया कि डाक्टर अक्सर अस्पतालों से गायब रहते है। आए दिन उपचार कराने के लिए आने वाले मरीजों को बिना उपचार के वापस लौटना पड़ता है। निजी डाक्टरों के पास उपचार कराने के लिए विवश होना पड़ता है। मरीजों का आरोप है कि डाक्टर सप्ताह में कोई ऐसा दिन नहीं जो कि उनको फोन से भुलाया जाए तब अस्पताल पहुंचते हैं।
सूत्रों की माने तो डॉक्टर सुनील कुमार किसी निजी अस्पताल में समय से मरीज देखते हैं।
राज्य की आयुर्वेदिक चिकित्सालय पर आए मरीजों ने आज डॉक्टर के विरुद्ध किया धरना प्रदर्शन सरकार से लगे कार्रवाई की गुहार। अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ की मनमानी को लेकर ग्रामीणों और मरीजों में रोष। मारिजुआना अस्पताल समय से खुलने और डॉक्टर के ऊपर कार्रवाई को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों का ज्ञान कराया आकर्षित।
आला अफसरों की मिलीभगत से डाक्टर घर बैठे ही वेतन ले रहे हैं।
यदि अफसरों की मिली भगत नहीं है तो डाक्टर आखिर अस्पताल क्यों नहीं आते हैं। सरकार मरीजों के लिए उपचार के लिए डाक्टरों पर मोटी रकम प्रति माह खर्च कर रही है लेकिन मरीजों को इसका कोई फायदा नहीं हो रहा है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि डॉक्टर साहब अपने प्राइवेट बैठते हैं या सरकारी दफ्तर में बैठते हैं।











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