गंगा महज एक नदी नहीं अपितु भारतीय सभ्यता व संस्कृति की प्राण धारा है। सदियों से गंगा नदी अपने निर्मल जल से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का पालन-पोषण करती आई हैं। गंगा जी की स्वच्छता करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य, भारत की सांस्कृतिक विरासत और आस्था, जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और देश की आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। गंगा 50% से अधिक आबादी के लिए पीने व सिंचाई का मुख्य स्रोत है। गंगा में प्रदूषण से हैजा जैसी जलजनित बीमारियां फैलती हैं और जलीय जीवन को खतरा उत्पन्न होता है।
करोड़ों लोग कृषिमत्स्य पालन और पर्यटन के लिए गंगा पर निर्भर हैं। स्वच्छ गंगा इन आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है। गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से प्रतिबद्ध हैं। साथ ही इस कार्य में आम जनता की प्रतिबद्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। नमामि गंगे योजना के माध्यम से आम जनता की सहभागिता स्वच्छता हेतु बढ़ती जा रही है
जिसने गंगा की निर्मलता हेतु एक सार्थक संदेश दिया है । विभिन्न स्तरों पर सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं तो निश्चित तौर पर गंगा अपने निर्मल अविरल जल से जीवनदायिनी बनकर भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति को पल्लवित एवं पुष्पित कर रही हैं।
आइए गंगोत्री से निकलकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार , झारखंड एवं पश्चिम बंगाल में प्रवाहित होने वाली गंगा को स्वच्छ एवं अविरल बनाने का एक भागीरथ प्रयास हम सब मिल-जुलकर करें ताकि मां गंगा भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की विकास यात्रा को अपना आशीर्वाद और सानिध्य प्रदान करती रहें । हम भारतवासी मिलकर भारत की अनमोल धरोहर को सुरक्षित रख सकें।











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